पिछले दिनों सकारात्मक वैश्विक संकेत से शेयर बाजार में दिखी तेजी
बुधवार को सकारात्मक वैश्विक संकेतों ने समग्र बाजार भावना को बढ़ावा दिया। शुरुआती कारोबार में लगभग सभी प्रमुख एशियाई बाजार हरे निशान में थे। जापान का निक्केई और कोरिया का कोस्पी तीन प्रतिशत तक चढ़ गए, जबकि अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की खबरों के बीच चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स एक प्रतिशत ऊपर चढ़ गया। संघर्ष में तनाव कम होने के संकेतों से बाजार में उम्मीद की किरण जगी। राष्ट्रपति ट्रंप और ईरानी शासन के बयानों से संकेत मिला कि संघर्ष जल्द ही समाप्त हो सकता है। विशेष रूप से, ईरान द्वारा यह दोहराना कि 'गैर-शत्रुतापूर्ण जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर सकते हैं' एक अच्छी खबर है जो भारत की ऊर्जा संबंधी चिंताओं को कम करेगी।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा अमेरिका-ईरान संघर्ष ने मुद्रास्फीति में संभावित वृद्धि की आशंकाओं को जन्म दिया था, जिससे मौद्रिक सख्ती और आर्थिक विकास में मंदी की आशंकाएं पैदा हो गई थी। हालांकि, संघर्ष के जल्द समाप्त होने के संकेतों ने भारत के व्यापक आर्थिक परिदृश्य पर इसके गंभीर प्रभाव की चिंताओं को कम कर दिया है।
हालांकि ईरान के प्रस्ताव को ठुकराने से गुरुवार को वैश्विक बाजार में चिंता बढ़ गई। एशियाई बाजारों में गिरावट देखने को मिली। अमेरिकी बाजार में भी नकारात्म माहौल रहा।
ब्याज दरों में कटौती को लेकर क्या है अनुमान?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें कम बनी रहती हैं और मुद्रास्फीति नियंत्रण में रहती है, तो केंद्रीय बैंक चालू वर्ष की दूसरी छमाही में ब्याज दरों में कटौती करने पर विचार कर सकते हैं। इसके साथ ही भू-राजनीतिक जोखिम में कमी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड पर दबाव पड़ा है। डॉलर इंडेक्स लगभग 0.40 प्रतिशत गिरकर 99 के करीब आ गया है, जबकि बेंचमार्क 10 साल के अमेरिकी बॉन्ड यील्ड एक प्रतिशत अधिक गिरकर 4.3 प्रतिशत आ गई।
जानकार कहते हैं अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में गिरावट सामान्य रूप से इक्विटी के लिए सकारात्मक होती है, विशेषकर भारत जैसे उभरते बाजारों के लिए क्योंकि इससे इन बाजारों में विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है। वहीं भारतीय रुपया दबाव में रहा, जो पिछले सेशन के 93.87 के मुकाबले 93.97 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर के पास बंद हुआ, जो करेंसी की मौजूदा कमजोरी को दिखाता है।