दक्षिणी राज्यों की ओर से कर धन के ‘अनुचित’ हस्तांतरण पर चिंता जताए जाने पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि राज्यों को 16वें वित्त आयोग के समक्ष अपनी चिंताओं को रखना चाहिए। वित्त आयोग की सिफारिशें यह तय करेंगी कि धन का बंटवारा कैसे किया जाए।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि केंद्र सरकार हस्तांतरण के फॉर्मूले पर फैसला नहीं करती है। करों का हस्तांतरण वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार किया जाता है और असंतुष्ट दक्षिणी राज्यों को मापदंडों में बदलाव के लिए आयोग से संपर्क करना चाहिए।
उन्होंने कहा, "यह राज्यों का काम है कि वे वित्त आयोग के साथ मिलकर उन मानदंडों के बारे में अपनी चिंताएं व्यक्त करें जिनके आधार पर उनकी ओर से कर हस्तांतरण के सिद्धांत निर्धारित किए गए हैं।"
वित्त आयोग आम तौर पर पांच साल के लिए कर राजस्व के विभाजन के लिए सिफारिशें देता है। 13वें वित्त आयोग ने 2010-11 से 2014-15 के लिए सिफारिशें दीं और उसके बाद के वित्त आयोग ने 2015-16 से 2019-20 के लिए फॉर्मूला सुझाया। 15वें वित्त आयोग ने अपनी पहली रिपोर्ट में 2020-21 और फिर 2021-2025-26 के लिए सुझाव दिए ।
पांच दक्षिणी राज्यों- आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल- की हिस्सेदारी 2021-22/2024-25 के दौरान घटकर 15.8 प्रतिशत रह गई, जो 2014-15 में लगभग 18.62 प्रतिशत थी, जो 14वें वित्त आयोग की रिपोर्ट के कार्यान्वयन का अंतिम वर्ष था। 2015-16 में यह आंकड़ा 18.04 प्रतिशत था। यह 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के कार्यान्वयन का पहला वर्ष था। अरविंद पनगढ़िया की अध्यक्षता वाले 16वें वित्त आयोग को 31 अक्तूबर, 2025 तक अपनी सिफारिशें उपलब्ध कराने का कार्य सौंपा गया है, ये सिफारिशें पांच वर्ष की अवधि के लिए होंगी।
इसके पूर्ववर्ती आयोग ने सुझाव दिया था कि राज्यों को केंद्र की शुद्ध कर प्राप्तियों का 41 प्रतिशत दिया जाना चाहिए, जबकि 2015-16 से 2019-20 के लिए यह 42 प्रतिशत था। 14वें वित्त आयोग ने राज्यों का हिस्सा 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत कर दिया था। 15वें वित्त आयोग ने जनसंख्या का भार तय करने के लिए पूर्ववर्ती आयोगों की ओर से इस्तेमाल की गई 1971 की जनगणना के आधार पर 2011 की जनगणना का उपयोग किया था।
यह पूछे जाने पर कि क्या कुछ राज्यों की ओर से अपने निवासियों से अधिक बच्चे पैदा करने के लिए कहना उचित है, सीतारमण ने कहा, "मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं कर रही हूं, क्योंकि उनका जो भी दृष्टिकोण है, उसे वित्त आयोग को बता दिया जाना चाहिए।" उन्होंने कहा, "चाहे सिद्धांत कुछ भी हो या कारक कुछ भी हो, यह उन्हें (राज्यों को) वित्त आयोग के समक्ष रखनी चाहिए।"