राज्य सरकार की प्रतिभूतियों (एसजीएस) की ताजा नीलामी में देश के छह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने कुल 14,900 करोड़ रुपये जुटाए। भारतीय रिजर्व बैंक ने यह जानकारी दी। नीलामी में कट-ऑफ प्रतिफल 7.02 प्रतिशत से 7.52 प्रतिशत के बीच रहा।
केंद्रीय बैंक के अनुसार, विभिन्न अवधियों के लिए कुल 15,300 करोड़ रुपये की पेशकश की गई थी, लेकिन अंतिम रूप से स्वीकृत राशि 14,900 करोड़ रुपये रही। नागालैंड ने अपनी 10-वर्षीय प्रतिभूति के लिए बोलियां स्वीकार नहीं करने का विकल्प चुना। राज्य ने 10 साल की सिक्योरिटी के जरिए 400 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बनाई थी, ने इस किश्त में कोई राशि स्वीकार नहीं की।
बिहार इस नीलामी में सबसे बड़े प्रतिभागियों में से एक रहा, जिसने तीन चरणों में 6,000 करोड़ रुपये जुटाए। पांच साल की अवधि के लिए 7.02 प्रतिशत ब्याज दर पर 2,000 करोड़ रुपये, नौ साल की अवधि के लिए 7.45 प्रतिशत ब्याज दर पर 2,000 करोड़ रुपये ग्यारह साल की अवधि के लिए 7.52 प्रतिशत ब्याज दर पर 2,000 करोड़ रुपये जुटाए।
गोवा ने 7.48 प्रतिशत की दर से 11 साल की सिक्योरिटी के जरिए 100 करोड़ रुपये जुटाए। हरियाणा ने 1,500 करोड़ रुपये जुटाए, जो 7.47 प्रतिशत की दर से 15 साल के बॉन्ड और 7.51 प्रतिशत की दर से 16 साल के बॉन्ड के बीच विभाजित थे। वहीं जम्मू और कश्मीर ने 7.51 प्रतिशत की दर से 20 साल के बॉन्ड के ज़रिए 300 करोड़ रुपये जुटाए।
मध्य प्रदेश ने तीन परिपक्वता अवधि के बांड जारी करके बाजार से 4,000 करोड़ रुपये जुटाए। राज्य ने 17-वर्षीय और 19 वर्षीय प्रतिभूतियों के माध्यम से क्रमशः 7.48 प्रतिशत और 7.50 प्रतिशत की प्रतिफल दर पर 1,500-1,500 करोड़ रुपये जुटाए। इसके अलावा, इसने 2041 में परिपक्व होने वाले अपने 6.99 प्रतिशत राज्य विकास ऋण (एसडीएल) के पुनर्निर्गम के माध्यम से 1,000 करोड़ रुपये जुटाए। यह मूल रूप से 17 नवंबर, 2021 को जारी किया गया था। इस पुनर्निर्गम के लिए कट-ऑफ मूल्य 95.07 रुपये निर्धारित किया गया था, जिसका मतलब है 7.5201 प्रतिशत की प्रतिफल दर। महाराष्ट्र ने तीन परिपक्वताओं में 3,000 करोड़ रुपये उधार लिए। इनमें 6.74 प्रतिशत पर चार वर्षीय बांड, 7.18 प्रतिशत पर 8 वर्षीय बांड और 7.24 प्रतिशत पर 9-वर्षीय बांड शामिल हैं।
यह यील्ड-आधारित नीलामी आरबीआई के नियमित कर्ज कार्यक्रम के तहत आयोजित की गई। राज्य विकास ऋण (एसडीएल), राज्य सरकारों द्वारा अपने राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिए जारी किए जाते हैं। प्रत्येक राज्य एक निर्धारित सीमा तक उधार ले सकता है। इन प्रतिभूतियों का जोखिम प्रोफाइल केंद्र सरकार की प्रतिभूतियों के समान होता है, लेकिन आम तौर पर ये उच्च प्रतिफल प्रदान करते हैं, जिससे ये बेहतर रिटर्न चाहने वाले संस्थागत निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बन जाते हैं।