Supreme Court on Land Acquisition: सर्वोच्च न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश सरकार और अन्य की ओर से दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिसमें राज्य उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें कहा गया था कि राज्य मुआवजा दिए बिना नागरिकों की भूमि पर कब्जा नहीं कर सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि उचित मुआवजा दिए बिना राज्य की ओर से लोगों की भूमि अधिग्रहण करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि हालांकि संपत्ति का अधिकार अब मौलिक अधिकार नहीं है, फिर भी यह एक संवैधानिक अधिकार है।
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सर्वोच्च न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश सरकार और अन्य की ओर से दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिसमें राज्य उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें कहा गया था कि राज्य मुआवजा दिए बिना नागरिकों की भूमि पर कब्जा नहीं कर सकता।
शीर्ष अदालत ने कहा, "हालांकि संपत्ति के अधिकार को अब मौलिक अधिकार नहीं माना जाता है, लेकिन यह अभी भी एक संवैधानिक अधिकार है। राज्य को उचित मुआवजा दिए बिना नागरिकों की भूमि अधिग्रहण करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।" पीठ ने कहा कि उसके सामने ऐसे कई मामले आए हैं, जिनमें हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य उच्च न्यायालय की खंडपीठ द्वारा पारित आदेशों को चुनौती दी है, जिसमें भूमि मालिकों को मुआवजा देने का निर्देश दिया गया है।
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न्यायालय ने कहा कि इन परिस्थितियों में राज्य द्वारा दायर याचिकाओं को भारी जुर्माने के साथ खारिज करना उचित होता। पीठ ने कहा, "हालांकि, हम अब ऐसा करने से बचते हैं और इन विशेष अनुमति याचिकाओं को खारिज करते हैं।" पीठ ने कहा कि भूमि मालिकों ने उच्च न्यायालय में शिकायत की थी कि उनकी भूमि का कब्जा सड़क निर्माण के लिए ले लिया गया, लेकिन उन्हें मुआवजा नहीं मिला।