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भारत के बवाल में आया एलन मस्क का नाम: क्या है स्टारलिंक विवाद, जिसका नाम लेकर संबित पात्रा ने विपक्ष को घेरा?

Sat, 10 Oct 2026 03:50 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

स्टारलिंक विवाद में संबित पात्रा ने राहुल गांधी और कांग्रेस के पुराने रुख पर सवाल उठाए। जानें एलन मस्क, जियो, एयरटेल और भारत सरकार के बीच क्या है पूरा मामला जिस पर भाजपा की ओर से अब तीखी प्रतिक्रिया आई है।  आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं। 
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देश में जारी सीजेपी के प्रदर्शन के बीच भाजपा नेता का बयान। - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी स्टारलिंक की भारत में एंट्री का विवाद अब कारोबारी प्रतिस्पर्धा से आगे बढ़कर राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है। एक तरफ मस्क भारत में सेवा शुरू करने की मंजूरी में देरी पर सवाल उठा रहे हैं, तो दूसरी तरफ राहुल गांधी ने उनके समर्थन में सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी है। भाजपा इस घटनाक्रम को कांग्रेस के पुराने रुख से जोड़ रही है। विवाद की जड़ में जियो और एयरटेल के साथ स्टारलिंक के समझौते, विदेशी कंपनी को भारत में कारोबार की अनुमति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े नियम हैं।

संबित पात्रा ने क्या कहा और कांग्रेस पर क्यों साधा निशाना?

भाजपा नेता संबित पात्रा ने शनिवार को स्टारलिंक विवाद को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कांग्रेस के पुराने बयानों और राहुल गांधी की हालिया प्रतिक्रिया के बीच विरोधाभास का मुद्दा उठाया। पात्रा ने कहा, "अब मैं असली कहानी पर आता हूं कि यह सारा खेल क्यों हो रहा है। कुछ दिनों पहले जयराम रमेश और सुप्रिया श्रीनेत- जो कांग्रेस के नेता हैं- दोनों ने स्टारलिंक को लेकर ट्वीट किए थे। 13 मार्च 2025 को जयराम रमेश ने लिखा था कि एयरटेल और जियो ने स्टारलिंक के साथ साझेदारी की घोषणा कर दी, जबकि पहले वे आपत्तियां जता रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री ने एलन मस्क के जरिए राष्ट्रपति ट्रंप से सद्भावना खरीदने के लिए यह रास्ता सुगम बनाया है। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा और टेस्ला मैन्युफैक्चरिंग पर भी सवाल उठाए थे। सुप्रिया श्रीनेत ने भी आरोप लगाया था कि मोदी जी ने एक विदेशी अरबपति के सामने सरेंडर कर दिया है'।

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पात्रा ने कहा, "लेकिन कल राहुल गांधी ने स्टारलिंक को लेकर क्या कहा? उन्होंने कहा- 'वेलकम टू इंडिया'! एलन जो नेता कुछ समय पहले कह रहे थे कि कोई विदेशी कंपनी भारत में आकर सैटेलाइट सेवा कैसे शुरू कर सकती है और इससे सुरक्षा को खतरा होगा, आज वही स्वागत कर रहे हैं।"

पात्रा ने कहा कि यह लड़ाई 'मोदी वर्सेस मीर जाफर' की है। कुछ ऐसे लोग हैं जो सत्ता के लिए देश को भी गिरवी रख सकते हैं। बिना चुनाव जीते और बिना मेहनत किए केवल सत्ता पर काबिज होने के लिए ये मीर जाफर दोहरा मापदंड अपनाने को तैयार हैं। जो लोग कल तक कह रहे थे कि विदेशी कंपनी के आने से सुरक्षा को खतरा होगा, आज उनके ही मालिक राहुल गांधी भारत को धता बता रहे हैं।" कम्युनिस्ट पार्टी के लोग आज भारतीय जनता पार्टी के दफ्तर के सामने आए, जो यह दर्शाता है कि भारत में लोकतंत्र कितना जीवित है।
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पात्रा ने कहा, "देश में न तो अराजकता चलेगी, न आतंकवाद और न ही नक्सलवाद। न ही कोई ईस्ट इंडिया कंपनी इन मीर जाफरों के कारण फिर से आकर विदेशी झंडा फहरा सकेगी। मोदी जी 140 करोड़ भारतीयों के पीछे खड़े हैं और देश की जनता भी उनके साथ खड़ी है।" उन्होंने कहा, "स्टार भी हमारा होगा, लिंक भी हमारी होगी, यह देश भी हमारा होगा और फतेह भी हमारी होगी!"

स्टारलिंक विवाद अचानक कैसे बढ़ा?

स्टारलिंक, एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा है। यह पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क और फाइबर ब्रॉडबैंड से अलग, पृथ्वी की निचली कक्षा में मौजूद उपग्रहों के जरिये इंटरनेट उपलब्ध कराती है। दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट पहुंचाने की इसकी क्षमता इसे भारत के लिए संभावित कारोबारी अवसर बनाती है।

हालिया विवाद तब तेज हुआ, जब मस्क ने भारत में सेवा शुरू करने की मंजूरी मिलने में देरी पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ प्रभावशाली कारोबारी हित स्टारलिंक की एंट्री रोककर बाजार में अपना दबदबा बनाए रखना चाहते हैं। बाद में उन्होंने रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी पर भी तंज कसा। मस्क ने सवाल किया कि क्या भारत में असली ताकत अंबानी के पास है।

भारत सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है। सरकार के अनुसार, सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाओं के लिए नियामकीय प्रक्रिया निष्पक्ष है और सभी कंपनियों को सुरक्षा संबंधी शर्तें पूरी करनी होंगी।

जियो और एयरटेल के समझौतों पर कांग्रेस ने पहले क्या सवाल उठाए थे?
इस विवाद की एक अहम कड़ी मार्च 2025 में हुए घटनाक्रम से जुड़ी है। उस समय भारती एयरटेल और रिलायंस जियो ने स्टारलिंक के साथ साझेदारी की घोषणा की थी। कांग्रेस के जयराम रमेश और सुप्रिया श्रीनेत जैसे नेताओं ने इन समझौतों के समय पर सवाल उठाए थे और इन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और एलन मस्क के बीच संबंधों के संदर्भ में देखा था।

कांग्रेस ने भारत में स्टारलिंक की संभावित एंट्री को लेकर सरकार और बड़ी कंपनियों की भूमिका पर लगातार सवाल उठाए थे। अब भाजपा इसी पुराने रुख के कारण राहुल गांधी की मौजूदा प्रतिक्रिया के बाद कांग्रेस पर यूटर्न का आरोप लगा रही है।

राहुल गांधी ने एलन मस्क को क्या जवाब दिया?

मस्क ने भारत में स्टारलिंक की मंजूरी में देरी पर सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि उनकी कंपनी 165 से अधिक देशों में लाइसेंस प्राप्त कर चुकी है और भारत के नियमों का पालन करने में पांच साल लगा चुकी है। इसके बाद राहुल गांधी ने जवाब दिया, “भारत में स्वागत है, एलन. तब तक इंतजार करें जब तक कोई अन्य व्यक्ति न मिले।” बीते जब सरकार की ओर से स्टारलिंक को भारत में सेवाएं शुरू करने की खबरें आई थीं उस दौरान देश के आईटी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी स्टारलिंक के बारे में सोशल मीडिया पर वेलकम पोस्ट लिखा था। उस दौरान वैष्णव ने लिखा था, "स्टारलिंक, भारत में आपका स्वागत है! यह दूरदराज के क्षेत्रों में रेलवे परियोजनाओं के लिए उपयोगी होगा।"

हालांकि अब राहुल गांधी की ओर से मस्क का वेलकम करने के पोस्ट के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर मस्क के पक्ष में खड़े होने का आरोप लगाया। राहुल गांधी की प्रतिक्रिया को भाजपा ने कांग्रेस के पहले के सवालों से जोड़ते हुए सवाल उठाया है। 

स्टारलिंक की एंट्री में अभी क्या अड़चन है?

भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने के लिए केवल शुरुआती लाइसेंस पर्याप्त नहीं है। सुरक्षा मूल्यांकन और स्पेक्ट्रम से जुड़ी आवश्यक मंजूरियां भी जरूरी हैं। स्टारलिंक के अलावा रिलायंस जियो की सैटेलाइट इकाई और भारती समूह समर्थित यूटेलसैट वनवेब भी इस क्षेत्र में मौजूद हैं।

सरकार का कहना है कि इन कंपनियों को आवश्यक सुरक्षा मंजूरी और नियामकीय प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसलिए फिलहाल विवाद का असली कारोबारी सवाल यह है कि भारत में सैटेलाइट इंटरनेट बाजार कब खुलेगा और कंपनियों को किन शर्तों पर सेवाएं शुरू करने की अनुमति मिलेगी।

इस विवाद का कारोबार और उपभोक्ताओं पर क्या असर होगा?

स्टारलिंक की एंट्री से दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी बढ़ाने की संभावना है। इससे ग्रामीण कारोबार, शिक्षा और उन इलाकों को फायदा मिल सकता है जहां पारंपरिक नेटवर्क की पहुंच सीमित है। दूसरी ओर, सुरक्षा, डेटा प्रबंधन, स्पेक्ट्रम आवंटन और सेवा की लागत जैसे सवाल भी अहम रहेंगे।

फिलहाल, संबित पात्रा ने इस प्रकरण को कांग्रेस के राजनीतिक रुख में बदलाव के तौर पर पेश किया है। लेकिन कारोबारी नजरिये से अंतिम तस्वीर नियामकीय मंजूरियों, प्रतिस्पर्धा की शर्तों और स्टारलिंक की वास्तविक लॉन्च टाइमलाइन से ही साफ होगी।

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