श्रीलंका में आर्थिक संकट विकराल होता जा रहा है और इसे काबू में करने की सरकार की तमाम कोशिशें नाकाफी नजर आ रही हैं। इस बीच मंगलवार को विश्व बैंक ने चेतावनी देते हुए कहा है कि बदहाली की मार झेल रहे श्रीलंका में इस साल गरीबी तेजी से बढ़ेगी। इसके साथ ही वर्ल्ड बैंक ने भारी कर्ज में कटौती, राजकोषीय घाटे को कम करने और गरीबों और कमजोरों को राहत देने की अपील की है।
आजादी के बाद सबसे बड़ा संकट
गौरतलब है कि द्विपीय देश श्रीलंका इन दिनों 1948 में ब्रिटेन से आजादी के बाद इतिहास के सबसे गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। इसकी प्रमुख वजह देश का विदेशी मुद्रा भंडार कम होना है। वर्तमान हालातों को देखें तो फॉरेक्स रिजर्व लगभग खत्म हो चुका है। देश जरूरी सामानों का आयात करने भी भी असमर्थ है। ये बड़ा कारण है श्रीलंका में पनपे इस विकराल आर्थिक संकट का।
विश्व बैंक ने बताई ये बड़ी वजह
देश में इस साल गरीबी बढ़ने की चेतावनी देते हुए विश्व बैंक ने कहा कि इसकी एक वजह यह भी है कि सरकार का समृद्धि कार्यक्रम पर्याप्त नहीं था। इसके तहत देश में लगभग 12 लाख गरीब परिवारों को शामिल किया गया, जबकि कोविड-19 महामारी के कारण श्रीलंकाई अर्थव्यवस्था 2020 में करीब 3.6 फीसदी घटी थी। वैश्विक निकाय ने कहा कि श्रीलंका में लगभग 11.7 फीसदी लोग प्रतिदिन 3.20 डॉलर (1087.45 श्रीलंकाई रुपये या 245 भारतीय रुपये) से कम कमाते हैं, जो निम्न-मध्यम आय वाले देशों के लिए गरीबी रेखा है। यह संख्या 2019 के मुकाबले 9.2 फीसदी अधिक है।
21.5 फीसदी के शिखर पर महंगाई
गौरतलब है कि देश में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) हालात को नियंत्रित करने के लिए तत्काल मदद देने की गुहार लगाई है। इस बीच सरकार की ओर से जारी आंकड़ों पर नजर डालें तो देश में महंगाई मार्च में 21.5 फीसदी के नए उच्च स्तर पर पहुंच चुकी है। यहां बता दें कि एक साल पहले समान अवधि में यह 5.1 फीसदी पर थी। देश के जनगणना और सांख्यिकी विभाग की ओर से जारी किए गए इन आंकड़ों के अनुसार, श्रीलंका में खाद्य पदार्थों पर महंगाई की बड़ी मार पड़ी है और यह मार्च में 29.5 फीसदी पर पहुंच गई है।
ईंधन की कीमतों में लगी आग
श्रीलंका इन दिनों एशिया में सबसे ज्यादा महंगाई की मार से बेहाल हो चुका है। विदेशी मुद्रा भंडार लगभग खत्म हो जाने के चलते देश जरूरी चीजों का आयात करने में सक्षम नहीं है। वर्तमान हालातों का जिक्र करें तो देश में पेट्रोल पंप सूखे पड़े हैं और जहां थोड़ा-बहुत तेल मौजूद है तो वहां लंबी लाइनें लगी हैं। इसे नियंत्रित करने के लिए सेना भी तैनात है। मार्च में ईंधन पर महंगाई के आंकड़े देखें तो ट्रांसपोर्टेशन में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले डीजल के दाम में तेल कंपनियों ने 64.2 फीसदी का भारी-भरकम इजाफा किया है।
कर्ज चुकाने में हाथ खड़े किए
देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह बर्बाद होने की कगार पर पहुंच चुकी है और हालात सुधरते दिखाई नहीं दे रहे हैं। हालात का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि चीन समेत कई देशों के कर्ज के जाल में फंसे द्विपीय देश ने बीते दिनों एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा था कि वह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से फंड को लेकर कोई निष्कर्ष निकलने से पहले 51 अरब डॉलर (3 लाख 88 हजार करोड़ रुपये) के विदेशी कर्ज को चुकाने में असमर्थ है। यानी विदेशी कर्ज चुकाने से श्रीलंका ने हाथ खड़े कर दिए हैं।