श्रीलंका में हालात सुधरते दिखाई नहीं दे रहे हैं। हर बीतते दिन के साथ मुसीबतें भी बढ़ती जा रही है। 51 अरब डॉलर (3.95 लाख करोड़ रुपये) के भारी भरकम कर्ज के तले दबे श्रीलंका में महंगाई बेलगाम हो चुकी है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, द्विपीय देश में महंगाई दर अप्रैल में उछलकर 29.8 फीसदी के नए उच्च स्तर पर पहुंच गई है।
खाद्य पदार्थों पर महंगाई 46.6 फीसदी
इतिहास के सबसे बड़े आर्थिक संकट का सामना कर रहे श्रीलंका में महंगाई के चलते आम जनता पस्त हो चुकी है। ईंधन से लेकर खाने-पीने की चीजों तक के दाम आसमान पर पहुंच गए हैं। गुरुवार को जारी किए गए महंगाई के आंकड़ों पर नजर डालें तो बढ़ती महंगाई के बीच खाद्य पदार्थों की कीमतों में सालाना आधार पर 46.6 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अलावा पेट्रोल-डीजल की कमी के चलते लोग परेशान हैं, तो देश में बिजली कटौती चरम पर पहुंच गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रतिदिन दस घंटे की कटौती की जा रही है।
फिच ने डिफॉल्ट में डाउनग्रेड किया
30 दिन की छूट के बावजूद भी अंतरराष्ट्रीय सावेरन बॉन्ड के भुगतान करने में चूकने के कारण न्यूयॉर्क स्थित रेटिंग एजेंसी फिच ने श्रीलंका को प्रतिबंधात्मक डिफॉल्ट में डाउनग्रेड कर दिया है। डाउनग्रेड ऐसे समय में आया है जब सेंट्रल बैंक के गवर्नर पी नंदलाल वीरसिंघे ने गुरुवार को स्वीकार किया कि श्रीलंका अपने कर्ज का भुगतान तब तक नहीं कर पाएगा, जब तक कि वह उनका पुनर्गठन नहीं करता।
78 मिलियन डॉलर के भुगतान से चूका
रिपोर्ट के मुताबिक, ये बांड भुगतान 7.8 करोड़ डॉलर का था, जिसे 18 अप्रैल को किया जाना था, लेकिन इसके भुगतान के लिएए 30 दिन की छूट दी गई थी, जो कि बुधवार 19 मई को पूरी हो गई और आर्थिक बदहाल देश इसका भुगतान करने में चूक गया। बता दें कि श्रीलंका के इतिहास में ऐसा पहली बार है जबकि कर्ज भुगतान में नाकाम हुआ है।
रेटिंग को 'सी' से घटाकर 'डी' किया
गौरतलब है कि बीते 12 अप्रैल को फिच ने श्रीलंका को डाउनग्रेड कर सी' कर दिया था। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि हमने अंतरराष्ट्रीय विदेशी मुद्रा सावेरन बांडों में ट्रिगर किए गए क्रॉस-डिफॉल्ट क्लॉज के मद्देनजर श्रीलंका की विदेशी मुद्रा को लेकर जारी रेटिंग को 'सी' से घटाकर 'डी' कर दिया है। इसका मतलब है कि 2.2 करोड़ लोगों का द्वीप राष्ट्र अपने इतिहास में पहली बार कर्ज चुकाने में नाकाम हो गया है।
आईएमएफ के साथ बातचीत जारी
यहां बता दें कि श्रीलंका ने पहले ही अंतरराष्ट्रीय सॉवरेन बॉन्ड, वाणिज्यिक बैंक ऋण, एक्ज़िम बैंक ऋण और द्विपक्षीय ऋण के लिए पुनर्भुगतान को निलंबित कर दिया है। श्रीलंका अब आईएमएफ के साथ ऋण पर बातचीत कर रहा है। देश को इस साल 10.6 करोड़ डॉलर का कुल भुगतान करना था, लेकिन अप्रैल तक वह केवल 1.24 करोड़ डॉलर का भुगतान करने में ही सफल रहा। वीरसिंघे ने गुरुवार को प्री-इम्पेक्टिव डिफॉल्ट की घोषणा करते हुए कहा था कि हम कर्ज भुगतान नहीं कर पा रहे हैं।
40 फीसदी पर पहुंच सकती है महंगाई
वीरसिंघे ने गुरुवार को अनुमान जताते हुए कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई के बीच पहले से ही श्रीलंका भारी उथल-पुथल में फंसा हुआ है और आने वाले महीने में देश की महंगाई दर 40 फीसदी तक पहुंच सकती है। उन्होंने कहा कि श्रीलंकाई मुद्रा में जारी गिरावट और भयाभह हुए आर्थिक हालातों के चलते देश में खाद्य और ईंधन आयात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। महंगाई में आए जबरदस्त उछाल के चलते जनता परेशान है और उसका गुस्सा हिंसक विरोध का रूप ले चुका है।