भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने अर्थव्यवस्था में सुस्ती के बीच सोमवार को बड़ा बयान दिया है। दास ने कहा है कि आर्थिक नरमी के लिए देश में मात्र वैश्विक कारक पूरी तरह से जिम्मेदार नहीं है। आगे उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक आर्थिक नरमी, मुद्रास्फीति में वृद्धि, बैंकों और एनबीएफसी की वित्तीय हालत को दुरुस्त करने के लिए जरूरी कदम उठाएगा।
रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने आगे भी नीतिगत दरों (रेपो दर) में कटौती के संकेत दिए हैं। उन्होंने सोमवार को कहा कि केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में कटौती का सिलसिला रोका है, क्योंकि वह नीतिगत नरमी के लिए सही समय का इंतजार कर रहा है। दास के मुताबिक, कॉरपोरेट, गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) और बैंक वर्तमान में अपने बहीखातों को साफ-सुथरा बनाने की प्रक्रिया में लगे हुए हैं, जिससे विकास दर के लिए नया आधार तैयार होगा।
एक मीडिया समूह के कार्यक्रम के दौरान दास ने देश की अर्थव्यवस्था पर ‘व्यापक और उद्देश्यपूर्ण चर्चा’ की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि आर्थिक सुस्ती के समाधान, महंगाई को थामने के साथ ही बैंकों और गैर बैंकिंग ऋणदाताओं की अच्छी सेहत सुनिश्चित करने के लिए हर जरूरी कदम उठाया जाएगा।
शक्तिकांत दास ने कहा कि केंद्रीय बैंक ने फरवरी में ही आर्थिक विकास दर में सुस्ती का अंदाजा लगा लिया था और यही वजह है कि सुस्ती का दौर शुरू होने से पहले ही प्रमुख नीतिगत (रेपो) दरों में कटौती शुरू कर दी गई। हालांकि, उन्होंने दरों में कटौती पर बाजार के आश्चर्यचकित होने पर हैरानी भी जाहिर की। उन्होंने कहा, ‘सरकार और आरबीआई दोनों ने समय पर काम किया। हमने अपनी नीतिगत दरों को घटाने के मामले में समय से पहले कदम उठाए।’
आरबीआई प्रमुख ने उम्मीद जाहिर की कि अमेरिका-चीन व्यापारिक विवाद जल्द ही खत्म हो जाएगा, जैसा कि पिछले सप्ताह के अंत में घोषणा की गई है। उन्होंने वर्ष, 2008 के आर्थिक संकट की तरह इस बार भी वैश्विक विकास के लिए मिल-जुलकर प्रयास किए जाने पर जोर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल में चीन के साथ समझौता होने के संकेत दिए थे।
दास के अनुसार, भारत को विनिर्माण क्षेत्र पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने भारतीय कंपनियों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनने के लिए कहा है, ताकि निर्यात को बढ़ाया जा सके। रिजर्व बैंक द्वारा किए गए 1539 कंपनियों के सर्वेक्षण का हवाला देते हुए दास ने कहा कि निवेश चक्र में सुधार के संकेत दिखने शुरू हो गए हैं।