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निवेश का अवसर: चांदी में सोने जैसी कमाई, 20 वर्षों में 922 फीसदी रिटर्न दिया, पर अस्थिरता के कारण जोखिम भी

Mon, 29 Sep 2025 05:00 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अजय केडिया, निदेशक केडिया एडवायजरी

सार

अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी के भाव नित नए रिकार्ड बना रही है। घरेलू बाजार में एमसीएक्स पर यह 1.35 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के ऊपर चल रही है। इस साल चांदी निवेशकों को 57 फीसदी का उच्च रिटर्न दे चुकी है। आने वालों कुछ वर्षों में इसके दो लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंचने का अनुमान है।
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चांदी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चांदी अब सिर्फ आभूषण या पारंपरिक भंडार नहीं रह गई है, बल्कि यह उच्च रिटर्न वाली निवेश विकल्प बन चुकी है। हाजिर बाजार में चांदी के भाव 1.40 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गए हैं। एमसीएक्स पर इस साल चांदी ने सोने को पीछे छोड़ते हुए अब तक करीब 57 फीसदी रिटर्न दिया है। फेडरल रिजर्व की संभावित दर कटौती, औद्योगिक मांग और ईटीएफ निवेश बढ़ने से चांदी के भाव लगातार बढ़ रहे हैं। गोल्ड-सिल्वर अनुपात अभी 86 पर है, जो संकेत दे रहा है कि चांदी अब भी सस्ती है। आने वाले दिनों में यह निवेशकों को अच्छी कमाई करा सकती है। हालांकि, अस्थिरता के कारण यह उच्च जोखिम वाला निवेश है।

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निवेश का मौका...पर जोखिम भी
भौतिक उपलब्धता में कमी ने चांदी की कीमतों को हवा दी है। भारतीय बाजार में भी वैश्विक तेजी की झलक है। चांदी ईटीएफ में निवेश बढ़ रहा है। भौतिक मांग बढ़ रही है। हालांकि, सोने की तुलना में चांदी 2-3 गुना अधिक अस्थिर है। इसलिए, निवेश के लिए 2-3 साल के मध्यम से लंबी अवधि का नजरिया होना चाहिए। मौजूदा माहौल में चांदी में निवेश के लिए अच्छा मौका मिल रहा है।

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निवेश के विकल्प और रणनीति
कुछ साल पहले तक भारत में चांदी गहने, सिक्के और बर्तन के रूप में खरीदी जाती थी। अब चांदी में निवेश के लिए एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) लोकप्रिय विकल्प हैं। ये ईटीएफ एनएसई और बीएसई पर ट्रेड होते हैं। इसमें तरलता, पारदर्शी कीमत और स्टोरेज की कोई चिंता नहीं रहती।

  • चांदी से जुड़े म्यूचुअल फंड भी अच्छे विकल्प हैं। कमोडिटी फंड, खनन कंपनियों के शेयर और एमसीएक्स फ्यूचर्स-ऑप्शन्स भी विकल्प हैं।
  • अपने पोर्टफोलियो को संतुलित करने के लिए इसमें 15 से 20 फीसदी हिस्सा चांदी के रूप में शामिल कर सकते हैं। एसआईपी के जरिये निवेश बेहतर रहेगा।
  • चांदी में उच्च रिटर्न की संभावना रहती है, लेकिन यह अस्थिर भी है। चांदी अब सिर्फ पारंपरिक धातु नहीं, बल्कि उच्च रिटर्न वाला निवेश विकल्प बन चुकी है। सही रणनीति और समय के साथ निवेश पर यह सोना बन सकती है।  

चांदी की तेजी के प्रमुख कारण
फेडरल रिजर्व की संभावित दर कटौती से चांदी की मांग बढ़ी है। पांच वर्षों से चांदी की वैश्विक मांग की तुलना में आपूर्ति कम है, जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ा है। सोलर पैनल, ई-वाहन और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों में बढ़ती खपत ने आपूर्ति की कमी को और गहरा कर दिया है। दूसरी ओर, डॉलर की कमजोरी और तनावों ने चांदी को निवेशकों के लिए सुरक्षित ठिकाना बना दिया है। रूस और सऊदी अरब के केंद्रीय बैंकों ने भी खरीद बढ़ाई है।

प्रदर्शन...20 साल में 922 फीसदी फायदा
चांदी ने 20 वर्षों में 922 फीसदी का रिटर्न दिया है, जो शेयर बाजार से काफी बेहतर है। इसका प्रदर्शन चक्रीय रहा है। इस अवधि में चांदी में बड़ा उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला। 2010 में चांदी ने 72 फीसदी और 2020 में 44 फीसदी का रिटर्न दिया। 2013-14 में 24 फीसदी से अधिक गिरावट रही। 2025 में चांदी ने फिर 57% रिटर्न के साथ सबसे मजबूत प्रदर्शन दिखाया है।

  • इस बार यह रैली औद्योगिक मांग, ग्रीन एनर्जी नीतियों, पेरू एवं मेक्सिको में आपूर्ति घाटा और ईटीएफ निवेश बढ़ने से दिखी है।
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भविष्य...छू सकती है दो लाख तक का स्तर

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दरअसल, सोना-चांदी अनुपात निवेशकों को चांदी की मजबूती का संकेत देता है। ऐतिहासिक रूप से यह 30-90 के बीच रहा है। इसका औसत 65-70 के दायरे में रहा है। साल 2025 में यह 107 के स्तर तक गया था। अब यह फिर से कम होकर 85-86 पर आ गया है। दरअसल, औद्योगिक मांग, कई देशों में आपूर्ति घाटा एवं ईटीएफ निवेश चांदी को और मजबूती प्रदान करते हैं। आने वाले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी 70 डॉलर प्रति औंस के उच्च स्तर को छू सकती है। इससे घरेलू बाजार में भी चांदी की कीमतें उसी अनुरूप बढ़ेंगी और भाव दो लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर तक जा सकते हैं।

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