चांदी अब सिर्फ आभूषण या पारंपरिक भंडार नहीं रह गई है, बल्कि यह उच्च रिटर्न वाली निवेश विकल्प बन चुकी है। हाजिर बाजार में चांदी के भाव 1.40 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गए हैं। एमसीएक्स पर इस साल चांदी ने सोने को पीछे छोड़ते हुए अब तक करीब 57 फीसदी रिटर्न दिया है। फेडरल रिजर्व की संभावित दर कटौती, औद्योगिक मांग और ईटीएफ निवेश बढ़ने से चांदी के भाव लगातार बढ़ रहे हैं। गोल्ड-सिल्वर अनुपात अभी 86 पर है, जो संकेत दे रहा है कि चांदी अब भी सस्ती है। आने वाले दिनों में यह निवेशकों को अच्छी कमाई करा सकती है। हालांकि, अस्थिरता के कारण यह उच्च जोखिम वाला निवेश है।
चांदी की तेजी के प्रमुख कारण
फेडरल रिजर्व की संभावित दर कटौती से चांदी की मांग बढ़ी है। पांच वर्षों से चांदी की वैश्विक मांग की तुलना में आपूर्ति कम है, जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ा है। सोलर पैनल, ई-वाहन और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों में बढ़ती खपत ने आपूर्ति की कमी को और गहरा कर दिया है। दूसरी ओर, डॉलर की कमजोरी और तनावों ने चांदी को निवेशकों के लिए सुरक्षित ठिकाना बना दिया है। रूस और सऊदी अरब के केंद्रीय बैंकों ने भी खरीद बढ़ाई है।
प्रदर्शन...20 साल में 922 फीसदी फायदा
चांदी ने 20 वर्षों में 922 फीसदी का रिटर्न दिया है, जो शेयर बाजार से काफी बेहतर है। इसका प्रदर्शन चक्रीय रहा है। इस अवधि में चांदी में बड़ा उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला। 2010 में चांदी ने 72 फीसदी और 2020 में 44 फीसदी का रिटर्न दिया। 2013-14 में 24 फीसदी से अधिक गिरावट रही। 2025 में चांदी ने फिर 57% रिटर्न के साथ सबसे मजबूत प्रदर्शन दिखाया है।
भविष्य...छू सकती है दो लाख तक का स्तर