शेयर बाजार इस हफ्ते उतार-चढ़ाव में रह सकता है। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के फैसले, टैरिफ की जारी चिंताओं और विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार निकासी पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी। औद्योगिक उत्पादन व पीएमआई विनिर्माण जैसे आर्थिक आंकड़ों की घोषणाओं पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। बाजार दो अक्तूबर को महात्मा गांधी जयंती के अवसर पर बंद रहेगा।
इस समय सबकी निगाहें संभावित राहत रैली के लिए अमेरिका-भारत व्यापार संबंधों पर टिकी हैं। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक सोमवार से शुरू होगी। इसका फैसला एक अक्तूबर को आएगा। यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि दरें घटेंगी तो बाजार में तेजी आ सकती है। एक अक्तूबर को वाहनों की बिक्री के आंकड़े, जीएसटी संग्रह और त्योहारी बिक्री भी महत्वपूर्ण कारक होगी। पिछले हफ्ते बीएसई सेंसेक्स 2,200 अंक या 2.66 फीसदी व एनएसई निफ्टी 672 अंक या 2.65 फीसदी गिरकर बंद हुआ था।
एच-1बी वीजा व फार्मा पर टैरिफ की गिरफ्त में बाजार
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, भारतीय शेयर बाजार पिछले हफ्ते सुस्त रुख के साथ बंद हुए। एच-1बी वीजा की बढ़ती लागत को लेकर चिंताओं के बीच आईटी सूचकांक शुरुआती दबाव में रहा। दवा उत्पादों पर नए अमेरिकी टैरिफ के कारण दवा कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली से धारणा और कमजोर हुई। बड़े शेयरों की तुलना में मझोले व छोटे शेयरों में ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। रुपया लगातार कमजोर होता रहा।
विदेशी संस्थागत निवेशकों ने निकाले 17,551 करोड़ रुपये
विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सितंबर में अब तक शेयर बाजार से 17,551 करोड़ रुपये की निकासी की है। अगस्त में 34,993 करोड़ रुपये और जुलाई में 17,741 करोड़ रुपये की निकासी की गई थी। इस तरह जनवरी से लेकर अब तक कुल 1.48 लाख करोड़ के शेयर इन निवेशकों ने बेचे हैं।
शीर्ष-10 कंपनियों की पूंजी तीन लाख करोड़ रुपये घटी
बाजारों में मंदी के चलते पिछले हफ्ते शीर्ष-10 कंपनियों की पूंजी 2,99,661 करोड़ घट गई। एच-1बी वीजा के चलते आईटी कंपनियों को सर्वाधिक नुकसान हुआ। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस (टीसीएस) की पूंजी सबसे अधिक 97,598 करोड़ घटकर 10.49 लाख करोड़ रह गई। रिलायंस की 40,461 करोड़ घटकर 18.64 लाख करोड़ रह गई। इन्फोसिस का मूल्य 38,095 करोड़ कम होकर 6.02 लाख करोड़ रह गया। एचडीएफसी बैंक को 33,000 करोड़ का घाटा हुआ। आईसीआईसीआई बैंक को 29,646 करोड़ का घाटा हुआ और यह 10 लाख करोड़ से नीचे पहुंच गया है। एयरटेल, एलआईसी, बजाज फाइनेंस और एसबीआई की भी पूंजी में गिरावट रही।