वैश्विक बाजारों में तेज बिकवाली के बीच पिछले चार दिनों से घरेलू शेयर बाजार में गिरावट के कारण इक्विटी निवेशकों की संपत्ति में 13.30 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आ गई है। सोमवार को लगातार चौथे दिन 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स टूटकर 953.70 अंक या 1.64 प्रतिशत की गिरावट के साथ 57,145.22 पर बंद हुआ। पूरे दिन के कारोबारी सोशन में इसमें 1,060.68 अंक यानी लगभग 1.82 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। एक समय पर यह 57,038.24 के स्तर पर पहुंच गया।
बीते चार दिनों में बीएसई बेंचमार्क में 2,574.52 अंक (4.31 फीसदी) की गिरावट आई है। इस दौरान बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण पिछले चार सत्रों में 13,30,753.42 करोड़ रुपये गिरकर 2,70,11,460.11 करोड़ रुपये पर रह गया।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के रिटेल रिसर्च सेगमेंट के प्रमुख सिद्धार्थ खेमका का मानना है कि घरेलू शेयर बाजार में पिछले चार कारोबारी सत्रों में घरेलू इक्विटी में चार प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है आने का बड़ा कारण वैश्विक अनिश्चितता की भावनाओं का बाजार पर हावी रहना है। बाजार में इस बड़ी बिकवाली के बाद छोटे समय अंतराल में एक बड़ी रिकवरी दिख सकती है।
हालांकि बाजार का ओवरऑल नैरेटिव कमजोर बना हुआ है क्योंकि इस सप्ताह के अंत में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की एमपीसी (Monetary Policy Committee) की भी बैठक होने वाली है। इस बैठक में लिए जाने वाले फैसले पर बाजार की आशंका भरी निगाहें टिकी हुई हैं। सोमवार को 30 शेयरों वाले सेंसेक्स पैक में
मारुति, टाटा स्टील, आईटीसी, एक्सिस बैंक, एनटीपीसी, बजाज फाइनेंस, इंडसइंड बैंक और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट देखने को मिली। जबकि एचसीएल टेक्नोलॉजीज, एशियन पेंट्स, इंफोसिस, अल्ट्राटेक सीमेंट, टीसीएस, नेस्ले और विप्रो के शेयर बाजार में कमजोरी के बावजूद लाभ में रहे। व्यापक बाजार की बात करें तो बीएसई स्मॉलकैप में 3.33 प्रतिशत और मिडकैप सूचकांक 2.84 प्रतिशत की गिरावट दिखी।
आईटी को छोड़कर सभी बीएसई सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान पर बंद हुए। इस दौरान रियल्टी सेक्टर 4.29 फीसदी, ऑटो (3.86 फीसदी), यूटिलिटीज (3.72 फीसदी), पावर (3.71 फीसदी), कमोडिटी (3.32 फीसदी), एनर्जी (3.17 फीसदी), तेल और गैस (3.10 प्रतिशत) और दूरसंचार (2.97 प्रतिशत) की गिरावट के साथ निचले स्तर पर बंद हुए।
निवेशकों को चिंता है कि जिस गति से दुनिया भर के केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर रहे हैं उससे विकास में सुस्ती आएगी और यह स्थिति अर्थव्यवस्थाओं को मंदी की ओर धकेल देगी।
कोटक सिक्योरिटीज के रिटेल इक्विटी सेगमेंट के प्रमुख श्रीकांत चौहान के अनुसार मौद्रिक नीति के तहत लिए गए फैसलों के कारण बैंकिंग, रियल्टी और ऑटो जैसी कंपनियों के स्टॉक बुरी तरह से टूट गए हैं दरों में बढ़ोतरी से मांग में कमी आने की आशंका है। हालांकि उनका यह भी मानना है कि बाजार में बड़े पैमाने पर बिकवाली हुई है इसलिए हमें एक त्वरित पुलबैक देखने को मिल सकती है। सोमवार घरेलू शेयर बाजार के सेशन में 2,925 फर्मों में गिरावट आई, जबकि 660 में वृद्धि दर्ज की गई है और 122 में कोई बदलाव नहीं हुआ।