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Sensex Record: पहली बार 65 हजार के पार बंद हुआ सेंसेक्स, निफ्टी निफ्टी की तेजी भी बरकरार; जानें तेजी की वजह

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Mon, 03 Jul 2023 04:50 PM IST

सार

आखिर सेंसेक्स में इस तेजी की वजह क्या है? यह तेजी कब तक जारी रह सकती है? कोरोना के बाद सेंसेक्स कैसे रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बना रहा है? बीते नौ साल में इसमें कितना बदलाव आया है? आइये जानते हैं…
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Stock Market - फोटो : Amar Ujala

शेयर बाजार में सोमवार को बंपर खरीदारी दिखी और सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने सर्वकालिक उच्च स्तर को छू लिया। सेंसक्स 486.49 अंक यानी 0.75 फीसदी चढ़कर 65,205.05 अंक पर बंद हुआ। ऐसा पहली बार हुआ है, जब सेंसेक्स ने 65 हजार का आंकड़ा पार कर बंद हुआ है। वहीं, निफ्टी भी रिकॉर्ड अंकों पर बंद हुआ है। निफ्टी 133.50 अंक यानी 0.70 फीसदी बढ़कर 19,322.55 पर बंद हुआ। 

आखिर सेंसेक्स में इस तेजी की वजह क्या है?
बाजार को रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचाने में बड़ा योगदान हैवीवेट शेयरों में बढ़ी खरीददारों की दिलचस्पी, मेटल सेक्टर के शेयरों का रहा। बुधवार के कारोबारी सत्र के पहले तीन सत्रों में निवेशकों को 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक का फायदा हुआ। मानसून की शुरुआत, एचडीएफसी बैंक और हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्प के विलय पूरा करने की घोषणा व जून डेरिवेटिव शृंखला की समाप्ति से बाजार को इस रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने में मदद मिली। अमेरिकी बाजार में हुई रैली से भी निवेशकों में सकरात्मक माहौल का भी बाजार को फायदा मिला। इसके चलते सभी सेक्टर हरे निशान पर रहे। 



यह तेजी कब तक जारी रह सकती है?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह माहौल जारी रह सकता है। साल के अंत तक निफ्टी 21,000 के स्तर को छू सकता है। इसी तरह सेंसेक्स में भी बढ़ोत्तरी देखी जा सकती है। इसके बाद मामूली मुनाफा वूसली का दौर आ सकता है। यह समय मुनाफा वूसली कर क्वालिटी स्टॉक में पुन: निवेश करने के लिए अच्छा समय है।

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Stock Market - फोटो : Amar Ujala
शेयर बाजार में सोमवार को बंपर खरीदारी दिखी और सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने सर्वकालिक उच्च स्तर को छू लिया। सेंसक्स 486.49 अंक यानी 0.75 फीसदी चढ़कर 65,205.05 अंक पर बंद हुआ। ऐसा पहली बार हुआ है, जब सेंसेक्स ने 65 हजार का आंकड़ा पार कर बंद हुआ है। वहीं, निफ्टी भी रिकॉर्ड अंकों पर बंद हुआ है। निफ्टी 133.50 अंक यानी 0.70 फीसदी बढ़कर 19,322.55 पर बंद हुआ। 

आखिर सेंसेक्स में इस तेजी की वजह क्या है?
बाजार को रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचाने में बड़ा योगदान हैवीवेट शेयरों में बढ़ी खरीददारों की दिलचस्पी, मेटल सेक्टर के शेयरों का रहा। बुधवार के कारोबारी सत्र के पहले तीन सत्रों में निवेशकों को 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक का फायदा हुआ। मानसून की शुरुआत, एचडीएफसी बैंक और हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्प के विलय पूरा करने की घोषणा व जून डेरिवेटिव शृंखला की समाप्ति से बाजार को इस रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने में मदद मिली। अमेरिकी बाजार में हुई रैली से भी निवेशकों में सकरात्मक माहौल का भी बाजार को फायदा मिला। इसके चलते सभी सेक्टर हरे निशान पर रहे। 

यह तेजी कब तक जारी रह सकती है?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह माहौल जारी रह सकता है। साल के अंत तक निफ्टी 21,000 के स्तर को छू सकता है। इसी तरह सेंसेक्स में भी बढ़ोत्तरी देखी जा सकती है। इसके बाद मामूली मुनाफा वूसली का दौर आ सकता है। यह समय मुनाफा वूसली कर क्वालिटी स्टॉक में पुन: निवेश करने के लिए अच्छा समय है।

Share Market - फोटो : Amar Ujala
कोरोना के बाद सेंसेक्स कैसे रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बना रहा है? 
जब देश में कोरोना ने दस्तक दी उस वक्त बाजार 41 हजार चल रहा था। 20 फरवरी को सेंसेक्स 41,170 के स्तर पर था। इसके बाद सेंसेक्स गिरना शुरू हो गया। 23 मार्च 2020 यानी जनता कर्फ्यू के अगले दिन बाजार 25,981 के निचले स्तर तक पहुंच गया। चार महीने से भी कम समय में करीब 20 हजार अंकों की गिरावट आई, लेकिन लॉकडाउन के दौरान बाजार ने धीरे-धीरे बढ़ना शुरू किया। यानी, बाजार ने करीब 37 फीसदी की गिरावट देखी।

तब से अब तक सेंसेक्स में कुल करीब 146 फीसदी का इजाफा हो चुका है। कोरोना के दौरान ही सेंसेक्स में सुधार दिखने लगा था। नवंबर 2020 में ही सेंसेक्स कोरोना की शुरुआत से पहले के स्तर को पार कर गया। फरवरी 2021 में सेसेक्स पहली बार 50 हजार के ऊपर बंद हुआ। वहीं, अगस्त 2021 में सेंसेक्स ने पहली बरा 55 हजार का आंकड़ा छुआ। अक्तूबर 2021 में यह 60 हजारी हो गया। अब 64 हजार के रिकॉर्ड तक पहुंच चुका है। 

सेंसेक्स की चाल - फोटो : Amar Ujala
मोदी पहली बार सत्ता में आए तो पहली बार 25 हजारी हुआ सेंसेक्स
16 मई 2014 को लोकसभा चुनाव के नतीजे आए। नरेंद्र मोदी पहली बार सत्ता में आए। मोदी सरकार का सेंसेक्स ने भी स्वागत किया और पहली बार 25 हजार के आंकड़े को छुआ था। दस महीने बाद 4 मार्च 2015 को सेंसेक्स ने 30 हजार के आंकड़े को छू लिया था।

मोदी सरकार की दूसरी जीत पर पहली बार 40 हजारी हुआ सेंसेक्स
23 मई 2019 को लोकसभा चुनाव के नतीजे आए। एक बार फिर नरेंद्र मोदी सरकार की सत्ता में वापसी हुई। बाजार ने भी नतीजों पर जश्न मनाया और पहली बार 40 हजार के आंकड़े को छुआ। 4 दिसंबर 2019 को बाजार 45 हजार के आंकड़े को छू चुका था। इसके बाद कोरोना ने दस्तक दी और बाजार का गिरना शुरू हुआ।

शेयर बाजार - फोटो : pixabay
सेंसेक्स पर कब-कब संकट आया?
सेंसेक्स के इतिहास में 2008 में मार्केट धराशायी हुआ। उस वक्त ग्लोबल इकॉनोमी 2008 और 2009 में अपने बुरे दौर से गुजर रही थी। 21 जनवरी 2009 को सेंसेक्स को 1408 प्वाइंट गिरा। इसके चलते एक घंटे के लिए ट्रेडिंग को बंद कर दिया गया था। इसी साल अक्तूबर में बाजार 8509.56 प्वाइंट पर बंद हुआ। ये आंकड़ा पिछले 10 साल में सबसे कम था। 2009 का साल भी बाजार के लिए सही नहीं था। इसकी वजह सत्यम घोटाला था।
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