कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के खौफ ने शेयर बाजार को चार महीने पीछे धकेल दिया। सेंसेक्स सोमवार को 1,190 अंकों की बड़ी गिरावट के साथ 56 हजार से नीचे चला गया तो निफ्टी को भी 371 अंकों का नुकसान हुआ। सुबह कारोबार की शुरुआत में ही सेंसेक्स 1,000 अंकों के नुकसान पर खुला और एक समय 1,879 अंकों की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था। यह 12 अप्रैल के बाद सबसे बड़ा इंट्रा डे नुकसान था। हालांकि, सुधार के बाद सेंसेक्स 1,189.73 अंक टूटकर 55,822.01 पर बंद हुआ। यह चार महीने का निचला स्तर है।
इससे पहले 23 अगस्त को सेंसेक्स 226 अंक चढ़कर 55,555.79 पर बंद हुआ था। निफ्टी भी 371 अंकों के नुकसान के साथ 16,614.20 पर पहुंच गया। बीएसई और एनएसई दोनों ही एक्सचेंज पर 2.5 फीसदी से ज्यादा गिरावट दिखी और निवेशकों के भी 6.79 लाख करोड़ रुपये डूब गए। शुक्रवार को भी सेंसेकस 889 अंक गिरा था और निवेशकों ने करीब 4.65 लाख करोड़ गंवा दिए थे। इस तरह, दो कारोबारी सत्र में ही निवेशकों की 11.82 लाख करोड़ रुपये पूंजी डूब गई और बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 252.57 लाख करोड़ पर आ गया। ब्यूरो
रिकॉर्ड स्तर से 12 फीसदी नीचे आया बाजार
सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही अक्तूबर के अपने रिकॉर्ड स्तर से 12 फीसदी नीचे आ चुके हैं। तब सेंसेक्स 62 हजार के ऊपर पहुंच गया था। इससे पहले सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही 2021 के शुरुआती 10 महीने में 20 अंकों की तेज बढ़ हासिल कर चुके थे। सोमवार को गिरावट का आलम ये रहा कि बीएसई की 30 में से 28 कंपनियां लाल निशान बंद हुईं और सिर्फ हिंदुस्तान युनिलीवर और डॉ. रेड्डीज में ही तेजी दिखी। निफ्टी के सभी 11 सेक्टर लाल निशान पर बंद और पीएसयू, रियल्टी व मेटल स्टॉक में तो 49 फीसदी तक गिरावट आई। बीएसई का बाजार पूंजीकरण भी मार्च, 2020 के मुकाबले दोगुना पहुंच गया था, लेकिन पिछले कुछ सत्र से जारी गिरावट ने करीब 28 लाख करोड़ रुपये घटा दिए हैं।
विदेशी बाजारों का हाल
- एशिया के प्रमुख बाजारों में शामिल शंघाई, टोक्यो, हांगकांग और सियोल में 3 फीसदी तक बड़ी गिरावट दिखी।
- लंदन का बाजार 1.7 फीसदी, जर्मनी का 2.4 फीसदी और पेरिस का 2 फीसदी तक नीचे आया।
- अमेरिकी बाजार एसएंडपी-500 और डाउ जोंस में 1.5 फीसदी तक बड़ी गिरावट आई।
पांच कारणों से हिला शेयर बाजार
- चीन के केंद्रीय बैंक ने अप्रैल, 2020 के बाद पहली बार ब्याज दरों में कटौती की।
- यूरोप के अधिकतर देशों में ओमिक्रॉन की स्थिति गंभीर होती जा रही और अर्थव्यवस्था को एक और लॉकडाउन की चिंता सताने लगी है।
- अमेरिकी फेड रिजर्व ने फरवरी से बॉन्ड खरीद रोकने का फैसला किया है। इससे ब्याज दरें बढ़ने और कर्ज महंगा होने की आशंका है।
- इस्पात, क्रूड सहित अन्य कमोडिटी की बढ़ती कीमतों से दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं को महंगाई की चिंता हो रही।
- विदेशी निवेशक पोर्टफोलियो (एफपीआई) से दिसंबर में 26 हजार करोड़ निकाले गए, शुक्रवार को ही 2,069 की बिकवाली हुई।