अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत को लेकर छाई अनिश्चितता और पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ा है। विदेशी निवेशकों की ओर से बिकवाली के दबाव के कारण इक्विटी बाजारों में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में भारी दबाव दिखा। वहीं दूसरी ओर, कमोडिटी बाजार में सरकार के एक बड़े फैसले के बाद सोने और चांदी की कीमतें नए स्तर पर पहुंच गईं हैं। बुधवार को शुरुआती कारोबार में मामूली बढ़त के बाद बेंचमार्क इक्विटी सूचकांक नकारात्मक दायरे में फिसल गए।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने एक लंबे भू-राजनीतिक संकट की आशंकाओं को जन्म दे दिया है। इस तनाव के कारण निवेशकों का जोखिम लेने का उत्साह (रिस्क एपेटाइट) काफी कमजोर हो गया है। यही वजह है कि 13 मई 2026 के शुरुआती कारोबार में भी बाजारों में लगातार बिकवाली का दौर जारी रहा।
कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और लगातार भू-राजनीतिक अनिश्चितता इसका मुख्य कारण रही। विदेशी फंडों की निकासी ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। हालांकि, दोनों बेंचमार्क सूचकांक इस गति को बनाए रखने में विफल रहे। बीएसई सेंसेक्स 182.60 अंक गिरकर 74,362.19 पर कारोबार कर रहा था। निफ्टी 41.05 अंक गिरकर 23,352.25 पर आ गया।
शेयर बाजार की सुस्ती के बिल्कुल विपरीत, घरेलू कमोडिटी बाजार में मजबूत खरीदारी (बाइंग मोमेंटम) के कारण भारी तेजी देखने को मिल रही है। इसके पीछे सबसे बड़ा ट्रिगर सरकार का वह फैसला है, जिसके तहत सोने और चांदी के आयात पर कुल कस्टम ड्यूटी को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है। इस नई 15 प्रतिशत की ड्यूटी में 10 प्रतिशत बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5 प्रतिशत एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (एआईडीसी) शामिल किया गया है।
सरकार के इस फैसले से मूल्य निर्धारण की धारणा (प्राइसिंग सेंटीमेंट) बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे वायदा बाजार में कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है:
घरेलू व्यापार में कीमती धातुओं में यह रैली ऐसे समय में आई है, जब ठीक पिछले सत्र में चांदी बढ़त के साथ बंद हुई थी और सोने में मामूली गिरावट दर्ज की गई थी। पश्चिम एशिया के हालातों और अमेरिका-ईरान वार्ता पर छाई अनिश्चितता ने फिलहाल शेयर बाजार में निवेशकों को सतर्क कर दिया है, जिससे इक्विटी में लगातार बिकवाली हो रही है। वहीं, सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने-चांदी में कस्टम ड्यूटी में बढ़ोतरी के कारण रिकॉर्ड तेजी दर्ज की जा रही है। आने वाले दिनों में बाजार की चाल काफी हद तक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और वैश्विक संकेतों पर ही निर्भर करेगी।