घरेलू शेयर बाजार में शुरुआती बिकवाली के बाद दिन के सत्र में रिकवरी दिख रही है। सेंसेक्स अपने निचले स्तर से करीब 950 अंकों की रिकवरी करता दिखा। निफ्टी 22,450 का स्तर पार करने में सफल रहा है। दोपहर 1 बजकर 43 मिनट पर सेंसेक्स पिछले दिन के मुकाबले 473.26 (0.64%) अंक गिरकर 72,661.06 के स्तर पर जबकि निफ्टी 146.11 (0.64%) की नरमी के साथ 22,533.30 के स्तर पर कारोबार करता दिखा।
शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स की सभी 30 कंपनियां नुकसान में कारोबार कर रही थीं। सबसे ज्यादा पिछड़ने वाले प्रमुख शेयरों में सन फार्मा, इंडिगो, अदाणी पोर्ट्स, इटरनल, लार्सन एंड टुब्रो, एशियन पेंट्स, एनटीपीसी, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, ट्रेंट, कोटक महिंद्रा बैंक, एक्सिस बैंक और पावरग्रिड शामिल रहे।
इसका असर केवल भारत तक सीमित नहीं है। अमेरिकी बाजार बुधवार को भले ही बढ़त के साथ बंद हुए हों, लेकिन गुरुवार को व्यापक एशियाई बाजारों में भारी बिकवाली देखी गई। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 4.31 प्रतिशत, जापान का निक्केई 2.24 प्रतिशत, हांगकांग का हैंगसेंग 1.04 प्रतिशत और शंघाई का कंपोजिट इंडेक्स 0.53 प्रतिशत गिर गया।
भारतीय रुपये ने ऐतिहासिक निचले स्तर से शानदार वापसी करते हुए गुरुवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 151 पैसे की मजबूत रिकवरी दर्ज की है। यह उछाल मुख्य रूप से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से 'ऑनशोर फॉरवर्ड डिलीवरी मार्केट' में बैंकों की नेट ओपन पोजीशन को सीमित करने के त्वरित कदम का नतीजा है। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में, रुपया 94.62 पर खुला और शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले तेजी से बढ़कर 93.19 पर पहुंच गया। पिछले बंद भाव के मुकाबले रुपये में 151 पैसे या 1.6 प्रतिशत की मजबूती आई है।
वैश्विक अस्थिरता का सीधा असर भारतीय रुपये और घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। विशेषज्ञ वीके विजयकुमार ने आगाह किया है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमत, बढ़ता व्यापार घाटा, घटते रेमिटेंस (प्रेषण) की आशंका और लगातार एफपीआई (एफपीआई) बिकवाली रुपये पर भारी दबाव डाल रहे हैं। डॉलर वायदा सौदों पर आरबीआई (आरबीआई) के प्रतिबंधों के बावजूद यह दबाव कम नहीं हो रहा है। आगे चलकर बाजार और अर्थव्यवस्था की दिशा काफी हद तक पश्चिम एशिया के सैन्य घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी।