भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को मिला-जुला रुख देखने को मिला। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण निवेशक सतर्क रहे। सेंसेक्स करीब 114 अंक की बढ़त के साथ बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 40 अंक से अधिक गिरकर 24,400 के स्तर से नीचे आ गया।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने बताया कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें एक बड़ी चिंता बनी हुई हैं। मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण बाजार में मजबूत जोखिम लेने का माहौल नहीं बन पा रहा है। वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 1.44 फीसदी गिरकर 87.70 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। एचएसटी वेल्थ के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरिसिल्वन राधाकृष्णन ने कहा कि बाजार में लचीलापन है। हालांकि, इसमें कोई मजबूत दिशात्मक संकेत नहीं दिख रहा है।
राधाकृष्णन ने आगे कहा कि अमेरिकी मौद्रिक नीति में कम प्रतिबंधात्मक होने की उम्मीदों से वैश्विक निवेश का माहौल सुधरा है। फिर भी, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और भू-राजनीतिक अनिश्चितता घरेलू निवेशकों को सतर्क रख रही हैं। उन्होंने बताया कि ऊर्जा बाजारों पर अधिक स्पष्टता आने तक भारतीय इक्विटी बाजार सीमित दायरे में रहने की संभावना है। कंपनियों की आय और शेयर-विशिष्ट घटनाक्रम ही बाजार के प्रदर्शन को आगे बढ़ाएंगे। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3.56 फीसदी चढ़ा। जापान का निक्केई 225 भी 1.16 फीसदी बढ़कर बंद हुआ।
हालांकि, शंघाई का एसएसई कंपोजिट सूचकांक और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। अधिकांश यूरोपीय बाजार सकारात्मक दायरे में कारोबार कर रहे थे। अमेरिकी बाजार बुधवार, 12 अगस्त 2026 को ज्यादातर बढ़त के साथ बंद हुए थे। एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बुधवार को 1,002.50 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। बुधवार को सेंसेक्स 187.90 अंक या 0.24 फीसदी गिरकर 77,966.35 पर बंद हुआ था। निफ्टी भी 35.75 अंक या 0.15 फीसदी गिरकर 24,435.95 पर समाप्त हुआ था।