पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव, बढ़ते तेल मूल्य और अमेरिकी व्यापार शुल्क की नई चिंताओं के कारण भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार को लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए। निवेशकों ने सावधानी बरती, जिससे बाजार की धारणा कमजोर रही। विदेशी पूंजी की निकासी और एचडीएफसी बैंक में बिकवाली ने भी बाजार के माहौल को प्रभावित किया।
बीएसई सेंसेक्स 331.62 अंक या 0.43 फीसदी गिरकर 76,059.77 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 916.96 अंक या 1.20 फीसदी तक गिरकर 75,474.43 पर पहुंच गया था। एनएसई निफ्टी 102.15 अंक या 0.43 फीसदी की गिरावट के साथ 23,767.45 पर समाप्त हुआ। सेंसेक्स में गिरावट दर्ज करने वाले प्रमुख शेयरों में इटरनल, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, भारती एयरटेल, एशियन पेंट्स और इन्फोसिस शामिल थे।
आईटी सेवा कंपनी इन्फोसिस का शेयर एक फीसदी गिरा, क्योंकि उसने व्यापक आर्थिक अनिश्चितता के बीच अपने पूरे वर्ष के राजस्व अनुमान को 1.5 फीसदी से 3 फीसदी के बीच संशोधित किया। एचसीएल टेक, आईटीसी, एक्सिस बैंक और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज लाभ में रहे। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट कच्चा तेल शुक्रवार को 3.66 फीसदी गिरकर 96.98 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि पिछले सत्र में यह 100 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल को पार कर गया था। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 23 जुलाई 2026 को 2,999.23 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
बाजार में गिरावट के मुख्य कारण क्या रहे?
एनरिच मनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पोनमुडी आर ने बताया कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी व्यापार शुल्क की चिंताओं के कारण भारतीय इक्विटी बाजार लगातार पांचवें सत्र में गिरे। निवेशकों ने सावधानी बरती और जोखिम से बचने का माहौल बना रहा। एशियाई बाजारों में कमजोरी ने भी इस धारणा को मजबूत किया। ऊर्जा बाजारों में दबाव कम होने के संकेतों के बावजूद व्यापक बिकवाली देखी गई।
आगे बाजार की क्या दिशा हो सकती है?
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि निकट भविष्य में बाजार की धारणा दबाव में रह सकती है। उच्च स्तर पर बने रहने वाले तेल मूल्य प्रमुख व्यापक आर्थिक संकेतकों और वृद्धि की गतिशीलता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। वाशिंगटन के नए आयात शुल्क ने निर्यात-उन्मुख अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक और चुनौती खड़ी कर दी है। प्रौद्योगिकी-केंद्रित बाजार सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं, क्योंकि उच्च दरें वृद्धि पर असर डाल रही हैं। निवेशक अन्य उभरते बाजार अवसरों में अपना निवेश विविधतापूर्ण करना चाहते हैं।