पीएम नरेंद्र मोदीकी ओर से देश में पेट्रोल-डीजल के इस्तेमाल में किफायत बरतने की अपील के बाद घरेू शेयर बाजार में सोमवार को बड़ी गिरावट दिखी। दलाल स्ट्रीट पर निवेशकों की चौतरफा बिकवाली के कारण प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी सोमवार को औंधे मुंह गिर गए। सेंसेक्स 1,312.91 अंक गिरकर 76,015.28 पर बंद हुआ; निफ्टी 360.30 अंक गिरकर 23,815.85 पर आ गया। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 85 पैसे गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर 95.34 (अस्थायी) पर बंद हुआ।
बाजार में लगातार बने दबाव के बीच आज का कारोबारी सत्र निवेशकों के लिए भारी नुकसान वाला साबित हुआ।
शेयर बाजार की इस चौतरफा बिकवाली के साथ-साथ मुद्रा बाजार में भी रुपये की स्थिति बेहद कमजोर नजर आई।
शेयर बाजार में 1300 से अधिक अंकों की इस बड़ी गिरावट और रुपये के अपने ऐतिहासिक निचले स्तर (95.34) पर पहुंचने से बाजार का समग्र सेंटीमेंट प्रभावित हुआ है। सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट के साथ-साथ डॉलर के मुकाबले रुपये का कमजोर होना अर्थव्यवस्था और निवेशकों के लिए एक बड़ा घटनाक्रम है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर ने बताया कि ट्रंप द्वारा शांति प्रस्ताव खारिज किए जाने से पश्चिम एशिया में तनाव फिर से भड़क गया है, जिसका सीधा असर निवेशकों के सेंटीमेंट पर पड़ा है।
पीएम मोदी की अपील और बढ़ता दबाव
बाजार में सतर्कता का माहौल तब और गहरा गया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ऊर्जा (एनर्जी) बचाने और गैर-जरूरी विदेश यात्राओं से बचने की अपील की।
वैश्विक बाजारों का रुख
जहां भारतीय बाजारों में कोहराम मचा रहा, वहीं एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 0.38 प्रतिशत की गिरावट के साथ 62,479 पर बंद हुआ। इसके विपरीत, सिंगापुर का स्ट्रेट्स टाइम्स 0.42 प्रतिशत, हांगकांग का हैंग सेंग 0.06 प्रतिशत और ताइवान का वेटेड इंडेक्स 0.45 प्रतिशत की बढ़त के साथ सकारात्मक दायरे में बंद हुए।
अब आगे क्या आउटलुक?
बाजार के जानकारों का मानना है कि मौजूदा समय में भारत की मजबूत राजकोषीय स्थिति और भारी-भरकम विदेशी मुद्रा भंडार सरकार को कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का झटका सहने में मदद कर रहे हैं। हालांकि, अगर यह भू-राजनीतिक तनाव लंबे समय तक खिंचता है, तो देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। बढ़ते बॉन्ड यील्ड और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार हो रही निकासी को देखते हुए आने वाले समय में शेयर बाजार के सीमित दायरे में ही रहने की संभावना है।