हाल ही में जारी हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2024 के अनुसार, इंफोसिस के संस्थापक नारायण मूर्ति की कुल संपत्ति ₹36,600 करोड़ है। वे बेंगलुरु के पांचवें सबसे अमीर व्यक्ति जबकि भारत के 69वें सबसे अमीर व्यक्ति हैं। हालांकि, संपत्ति के मामले में इंफोसिस के एक अन्य सहसंस्थापक सेनापति 'क्रिस' गोपालकृष्णन नारायणमूर्ति से आगे निकल गए हैं। उनकी अनुमानित संपत्ति ₹38,500 करोड़ है।
गोपालकृष्णन ने 2007 से 2011 तक इस आईटी दिग्गज कंपनी इंफोसिस के सीईओ और प्रबंध निदेशक के रूप में कार्य किया है। उन्होंने 2011 से 2014 तक कंपनी के उपाध्यक्ष के रूप में भी काम किया। वह 2014 में कंपनी से सेवानिवृत्त हुए और अपनी सेवानिवृत्ति के बाद से उन्होंने अपने बिजनेस इनक्यूबेटर एक्सिलर वेंचर्स और कुछ वेंचर फंड के माध्यम से कई स्टार्टअप्स में निवेश किया है, इनमें ऑटोमोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी मोबिलिटी का नाम अहम है।
69 वर्षीय गोपालकृष्णन वर्तमान में एक्सिलर वेंचर्स के अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हैं, यह एक स्टार्टअप एक्सेलेरेटर है जिसने गुडहोम, कागज और एनकैश जैसी कंपनियों में निवेश कर रखा है। गोपालकृष्णन ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास से भौतिकी और कंप्यूटर विज्ञान में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की है। जनवरी 2011 में भारत सरकार ने गोपालकृष्णन को देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया था। उन्होंने आईआईटी मद्रास में अपनी पत्नी के नाम पर स्थापित सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन रिसर्च सेंटर को भी वित्त पोषित किया है।
वह भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास और भारतीय प्रबंधन संस्थान, बैंगलोर के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में कार्यरत हैं। इंफोसिस की वेबसाइट के अनुसार, वह आईआईआईटी, बैंगलोर के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष हैं। वे चेन्नई मैथमेटिकल इंस्टीट्यूट के बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज में भी शामिल हैं। जुलाई 1981 में इंफोसिस की स्थापना पुणे में की गई थी लेकिन वर्तमान में इसका मुख्यालय बेंगलुरु में स्थित है। इंफोसिस की स्थापना सात इंजीनियरों ने मिलकर की थी, जिनमें नारायण मूर्ति, नंदन नीलेकणी, क्रिस गोपालकृष्णन, एसडी शिबुलाल, के दिनेश, एनएस राघवन और अशोक अरोड़ा शामिल थे।