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Banking Sector: बेहतर लोन ग्रोथ आउटलुक देखकर बैंक सेक्टर पर निवेशक दे रहे ध्यान, जानकार बोले- सही चयन जरूरी

Mon, 28 Jul 2025 06:50 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

बैंक विशेषज्ञों और ब्रोकरेज हाउस का कहना है कि बेहतर लोन ग्रोथ आउटलुक की वजह से बैंक सेक्टर पर निवेशक ध्यान दे सकते हैं। हालांकि वर्तमान में बैंकिंग परिदृश्य में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए बैंक के मजबूत प्रदर्शन और विकास की क्षमता पर ध्यान देते हुए चयनात्मक दृष्टिकोण बनाना ही उचित होगा।
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बैंकिंग सेक्टर का प्रदर्शन - फोटो : Freepik
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विस्तार
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पहली तिमाही में (वित्त वर्ष पहली तिमाही 2026) में भारतीय बैंकिंग क्षेत्र ने अच्छा प्रदर्शन किया है। वर्तमान समय में बैंकिंग क्षेत्र संकट के बजाए 'पुनर्मूल्यांकन चरण'  से गुजर रहा है। बैंकिंग में, "पुनर्मूल्यांकन चरण" आमतौर पर उस अवधि को संदर्भित करता है जब बैंक नए नियमों, आर्थिक स्थितियों या आंतरिक मूल्यांकनों के अनुसार अपनी प्रणालियों, प्रक्रियाओं या रणनीतियों को समायोजित करता है।

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नीतिगत दरों में नरमी ने बैंकों का प्रदर्शन बेहतर किया
नीतिगत दरों में नरमी की वजह से बैंक सेक्टर बेहतर प्रदर्शन करने में सक्ष्म हुए हैं। बैंक विशेषज्ञों और ब्रोकरेज हाउसेस का कहना है कि बेहतर लोन ग्रोथ आउटलुक की वजह से बैंक सेक्टर पर निवेशक ध्यान दे सकते हैं। हालांकि वर्तमान में बैंकिंग परिदृश्य में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए बैंक के मजबूत प्रदर्शन और विकास की क्षमता पर ध्यान देते हुए चयनात्मक दृष्टिकोण बनाना ही उचित होगा।
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निजी बैंक का प्रदर्शन
बोक्रेज हाउस वेंचुरा के विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े निजी बैंकों ने अपने पहली तिमाही में अच्छा प्रदर्शन किया। बैंकों को यह रेपो-लिंक्ड ऋणों के उच्च अनुपात के कारण हुआ है। इसलिए बैंकों को ब्याज दरों में उतार चढ़ाव और ट्रेजरी लाभ व आईटी रिफंड सहित मजबूत गैर ब्याज आय का लाभ मिला। उनकी परिसंपत्ति गुणवत्ता को मजबूत बनाने में बफर्स के मजबूत प्रावधान से भी बल मिला है।  

मध्यम आकार के बैंकों की स्थिति
वेंचुरा के विशेषज्ञों कहते हैं कि इसके विपरीत मध्यम आकार के बैंकों को उच्च ब्याज परितवर्तन और वित्तपोषण लगात में कमी से सीमित लाभ के कारण शुद्ध ब्याज मार्जिन (एनआईएम) पर अधिक दबाव का सामना करना पड़ा है। हालांकि कुछ बैंकों को किफायती आवास या व्यवसाय बैंकिंग जैसे पोर्टफोलियो में वृद्धि देखने को मिली और ट्रजरी लाभ ने भी इन बैंकों को कुछ राहत प्रदान की।  

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक दबाव का सामना कर रहे 
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक भी नेट इंटरेस्ट मार्जिन (एनआईएम) में दबाव का सामना कर रहे हैं, लेकिन ट्रेजरी लाभ और बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता के सहारे कर पश्चात लाभ (पीएटी) में मामूली वृद्धि की उम्मीद है। यह अक्सर रिटेल और गोल्ड लोन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने से बैंकों के कारोबार को गति देता है। ब्रोकरेज फर्म के अनुसार पूरे सेक्टर के लिए वित्त वर्ष 26 की पहली छमाही तक एनआईएम पर दबाव जारी रहने की उम्मीद है, क्योंकि जमा पर ब्याज दरों में कटौती का पूरा असर अभी नहीं मिल पाया है। एनआईएम में सुधार वित्त वर्ष 26 की दूसरी छमाही से होने की उम्मीद है, क्योंकि जमा पुनर्मूल्यन पूरी तरह से लागू हो जाएगा और ब्याज दर का चक्र स्थिर होने की उम्मीद है। वित्त वर्ष में इस सेक्टर की संपूर्ण आय धीमी रहने की संभावना है। इसके बाद वित्त वर्ष 2027 में अधिक अनुकूल ब्याज दरों और नए सिरे से ऋण की मांग उछाल आने की संभावना विशेषज्ञों को है।  

मौजूदा बैंकिंग परिदृश्य
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के विशेषज्ञ कहते हैं कि वर्तमान में बैंकिंग परिदृश्य में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए बैंक के मजबूत प्रदर्शन और विकास की क्षमता पर ध्यान देते हुए चयनात्मक दृष्टिकोण बनाना उचित होगा। हालांकि बडे़ बैंकों में आईसीआईसीआई बैंक ने कर के बाद लाभ में साल दर साल 15.5 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की है। साथ ही 4.34 का शुद्ध मार्जिन बनाए रखा, जो कुशल मार्जिन प्रबंधन का संकेत है। 
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वहीं इंडियन ओवसरसीज बैंक ने मजबूत प्रदर्शन किया और एडवांस में 14.05 प्रतिशत की  वार्षिक वृद्धि और डिपॉजिट में 10.75 प्रतिशत की वृद्धि के साथ बेहतर कासा अनुपात का भी समर्थन बैंक को मिला है। वहीं आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने अनुमान के अनुरूप पहली तिमाही में प्रदर्शन किया है। बैंक ने पहली तिमाही में 460 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया है। इसके मजबूत कासा ग्रोथ (लगभग 30 प्रतिशत सालाना) हासिल करने में मदद मिली है।  बैंक ऑफ बड़ौदा की शुद्ध लाभ पहली तिमाही में 1.9 प्रतिशत बढ़कर 4,541 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल बैंक ने 4,458 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया था। हालांकि बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक के पहली तिमाही के नतीजे मंगलवार को आने वाले हैं।

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