फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

SEBI Penalty: सेबी ने एनएसई, चित्रा रामकृष्णा और 16 अन्य पर 44 करोड़ का जुर्माना लगाया 

Wed, 29 Jun 2022 04:10 PM IST
विवेक दास बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

शेयर बाजार के रेग्युलेटर सेबी ने एनएसई पर सात करोड़, चित्रा रामकृष्णा, वाराणसी और सुब्रममण्यम आनंद पर पांच-पांच करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। बाकी बची राशि का जुर्माना स्टॉक ब्रोकर कंपनियों पर लगाया गया है।
विज्ञापन
आनंद सुब्रमण्यम और चित्रा रामकृष्ण - फोटो : social media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

स्टॉक मार्केट में चंद सेकंड पूर्व मिली जानकारी करोड़ों रुपयों का मुनाफा करवा सकती है। यही जानकारियां कुछ खास शेयर ब्रोकर कंपनियों को पहुंचाने के ‘डार्क फाइबर’ केस में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई), एक्सचेंज की पूर्व एमडी-सीईओ चित्रा रामकृष्णा, उसके सलाहकार आनंद सुब्रमण्यम सहित 18 लोगों व फर्मों पर सेबी ने 44 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। उन्हें यह जुर्माना 45 दिन में चुकाने के लिए कहा गया है।

विज्ञापन


इस मामले में स्टॉक मार्केट की नियामक संस्था सेबी ने साल 2009 से 2016 के बीच कई लोगों और संस्थाओं की गतिविधियों की जांच की। यह सभी लोग व संस्थाएं एनएसई के जरिए कुछ खास स्टॉक ब्रोकरों को विशेष कनेक्टिविटी मुहैया करवा रहे थे। इसकी वजह से स्टॉक मार्केट और दूसरे निवेशकों व ब्रोकर फर्मों के हितों को नुकसान पहुंचने का अंदेशा जताया गया था।

सेबी ने मंगलवार को दिए अपने आदेश में बताया कि यह कनेक्टिविटी ‘संपर्क’ नामक फर्म ने मुहैया करवाई। उसने एनएसई के लिए को-लोकेशन केबल बिछाई थीं। लेकिन इसका नेटवर्क इस प्रकार तैयार किया कि वे-2-वेल्थ ब्रोकर्स व जीकेएन सिक्युरिटीज जैसी फर्मों को फायदा हुआ।
विज्ञापन


ऐसे किया घपला
शेयर ब्रोकर फर्मों वे-2-वेल्थ ब्रोकर्स और जीकेएन सिक्युरिटीज को एनएसई के सर्वर से यहीं के ही अधिकारियों व कर्मचारियों ने जानकारियां पहुंचाईं। उन फर्मों के लिए ‘डार्क फाइबर’ बिछाई गई। डार्क फाइबर यानी ऐसी ऑप्टिकल फाइबर लाइन जो किसी अन्य काम में उपयोग नहीं की जाती, न किसी अन्य सक्रिय इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से जुड़ी होती है और न किसी अन्य व्यक्ति या संस्था तक इससे कोई डाटा पहुंचाया जाता है।

सेबी के अनुसार एनएसई के अधिकारियों व स्टाफ ने ही संपर्क को वे-2-वेल्थ और जीकेएन के लिए विशेष केबल बिछाने दिया। संपर्क फर्म के पास इसकी अनुमति नहीं थी। डार्क फाइबर से इन दोनों स्टॉक ब्रोकर फर्मों को ‘लेटेंसी एडवांटेज’ मिला। शेयर बाजार में कम लेटेंसी से इन दोनों को बाकी फर्म के मुकाबले बाजार के हालात पर तेज प्रतिक्रिया देकर ज्यादा मुनाफा कमाने का अवसर मिला। यह अंतर मिलीसेकंड्स में होता है। कई अध्ययनों के अनुसार 1 मिलीसेकंड की कम लेटेंसी 10 करोड़ डॉलर तक का फायदा औसतन दे सकती है।

इन पर लगा इतना जुर्माना

  • एनएसई पर 7 करोड़
  • वे-2-वेल्थ ब्रोकर्स फर्म पर 6 करोड़
  • जीकेएन सिक्युरिटीज फर्म पर 5 करोड़
  • चित्रा, आनंद, एनएसई के चीफ बिजनेस डवलपमेंट ऑफिसर रवि वाराणसी पर 5 करोड़
  • संपर्क इंफोटेनमेंट फर्म पर 3 करोड़
  • जीकेएन सिक्युरिटीज के 4 साझेदारों प्रशांत डिसूजा, ओम प्रकाश गुप्ता, सोनाली गुप्ता, राहुल गुप्ता पर 1.1 करोड़ रुपये
  • वे-2-वैल्थ के सीईओ एमआर शशिभूषण  पर 1 करोड़ रुपये
  • नेताजी पाटील, रीमा श्रीवास्तव, प्रशांत मित्तल और मोहित मुतरेजा पर 10 लाख
  • एनएसई के मुख्य सदस्यता अधिकारी नागेंद्र कुमार एसआरवीएस और को-लोकेशन सपोर्ट दे रहे आईटी ऑपरेशंस वाइस प्रेजिडेंट देवी प्रसाद सिंह पर 1 करोड़
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें