बाजार नियामक सेबी ने पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवाओं (पीएमएस) के ढांचे को अधिसूचित किया है। इससे पोर्टफोलियो प्रबंधकों के लिए निवेश के अवसर बढ़ गए हैं। अब वे आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) और प्राथमिक बाजार ऋण निर्गमों में निवेश कर सकेंगे। म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए एक अलग मार्ग भी पेश किया गया है।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (पोर्टफोलियो प्रबंधक) विनियम, 2026, मौजूदा 2020 के ढांचे की जगह लेंगे। ये नए नियम 1 अप्रैल, 2027 से प्रभावी होंगे। सेबी ने 7 अक्तूबर को जारी एक अधिसूचना में यह जानकारी दी।
पोर्टफोलियो प्रबंधक अब कहां निवेश कर पाएंगे?
नए पीएमएस ढांचे के तहत, पोर्टफोलियो प्रबंधक अपने ग्राहकों की ओर से आईपीओ में निवेश कर सकेंगे। वे प्राथमिक बाजार में ऋण प्रतिभूतियों के निर्गमों में भी निवेश कर पाएंगे। इसके अलावा, स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध या कारोबार की जाने वाली प्रतिभूतियां भी उनके निवेश दायरे में होंगी। मुद्रा बाजार के उपकरण और म्यूचुअल फंड भी इसमें शामिल हैं। उन्हें विदेशी प्रतिभूतियों, असूचीबद्ध प्रतिभूतियों और एक्सचेंज-ट्रेडेड डेरिवेटिव उपकरणों में निवेश की भी अनुमति होगी। बड़े मूल्य वाले मान्यता प्राप्त निवेशक असूचीबद्ध प्रतिभूतियों में अपने प्रबंधन के तहत परिसंपत्तियों का सौ फीसदी तक निवेश कर सकते हैं।
पीआरआईएम मार्ग क्या है और यह कैसे काम करेगा?
सेबी ने म्यूचुअल फंड इकाइयों में निवेश के लिए पोर्टफोलियो प्रबंधक मार्ग (पीआरआईएम) भी पेश किया है। यह पोर्टफोलियो प्रबंधकों को ग्राहकों के धन को म्यूचुअल फंड के डायरेक्ट प्लान में निवेश करने में सक्षम बनाएगा। इसमें भारतीय परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों (एएमसी) के ईटीएफ, इंडेक्स फंड और विशेष निवेश फंड (एसआईएफ) शामिल होंगे। पीआरआईएम (पोर्टफोलियो मैनेजर्स रूट फॉर इन्वेस्टिंग इन म्यूचुअल फंड यूनिट्स) के लिए न्यूनतम निवेश सीमा 25 लाख रुपये निर्धारित की गई है। जो संस्थाएं विशेष रूप से पीआरआईएम की पेशकश करती हैं, उन्हें 2 करोड़ रुपये की न्यूनतम नेट वर्थ बनाए रखनी होगी।
अन्य महत्वपूर्ण बदलाव क्या हैं?
नियामक ने स्वतंत्र फंड प्रबंधकों की अवधारणा भी पेश की है। ये पंजीकृत पोर्टफोलियो प्रबंधकों के सहयोग से ग्राहक पोर्टफोलियो का प्रबंधन और संचालन कर सकते हैं। हालांकि, पंजीकृत पोर्टफोलियो प्रबंधक उनकी गतिविधियों के लिए जिम्मेदार और उत्तरदायी बने रहेंगे। अनुपालन को आसान बनाने के लिए, सेबी ने प्रिंसिपल अधिकारियों के लिए शैक्षिक योग्यता में भी छूट दी है। अब स्नातक भी प्रिंसिपल अधिकारी के रूप में कार्य करने के पात्र होंगे। सेबी बोर्ड ने सितंबर में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।