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SEBI: सेबी ने 90% सरकारी हिस्सेदारी वाले सार्वजनिक उपक्रमों की आसान डीलिस्टिंग के लिए नियम बनाए, जानें सबकुछ

Tue, 09 Sep 2025 04:03 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

SEBI: सेबी की ओर से किए गए उपायों में सार्वजनिक शेयरधारकों की ओर से डीलिस्टिंग को मंजूरी देने के लिए दो-तिहाई सीमा की आवश्यकता में ढील और न्यूनतम मूल्य की गणना के तरीके में ढील शामिल है।
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शेयर बाजार नियामक सेबी - फोटो : PTI
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विस्तार
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बाजार नियामक सेबी ने ऐसे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) की स्वैच्छिक डीलिस्टिंग के लिए विशेष नियम बनाए हैं, जिनमें सरकार की 90 प्रतिशत या उससे अधिक हिस्सेदारी है।

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सेबी की ओर से किए गए उपायों में सार्वजनिक शेयरधारकों की ओर से डीलिस्टिंग को मंजूरी देने के लिए दो-तिहाई सीमा की आवश्यकता में ढील और न्यूनतम मूल्य की गणना के तरीके में ढील शामिल है। इसके अलावा, ऐसी डीलिस्टिंग एक निश्चित मूल्य पर हो सकती है। यह न्यूनतम मूल्य फ्लोर प्राइस से कम से कम 15 प्रतिशत प्रीमियम के साथ होनी चाहिए, चाहे ट्रेडिंग कितने ही अंतराल पर क्यों न हो रहा हो।

सेबी ने 1 सितंबर की अपनी अधिसूचना में कहा कि यह नियम सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और बीमा कंपनियों को छोड़कर) पर लागू होगा, जहां राज्य के पास 90 प्रतिशत या उससे अधिक हिस्सेदारी है।
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डीलिस्टिंग के लिए न्यूनतम मूल्य की गणना तीन विकल्पों में से अधिकतम का उपयोग करके की जाएगी। मौजूदा डीलिस्टिंग नियमों के तहत, प्रमोटर की शेयरधारिता 90 प्रतिशत तक पहुंचने पर डीलिस्टिंग सफल मानी जाती है। इसके अलावा, डीलिस्टिंग के लिए न्यूनतम मूल्य की गणना कई मूल्य निर्धारण मानदंडों, जैसे 60-दिन के औसत मूल्य और पिछले 26 हफ्तों के अधिकतम मूल्य के आधार पर की जाती है।

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