भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने खुदरा निवेशकों को बढ़ते निवेश फर्जीवाड़ों से आगाह किया है। उन्होंने बताया कि पहली बार निवेश करने वाले निवेशकों के लिए यह धोखाधड़ी एक बड़ी चिंता का विषय बन गई है। सेबी इन फर्जीवाड़ों पर लगाम लगाने और निवेशकों को जागरूक करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। इसी क्रम में 'प्रोजेक्ट जागरूक' जैसी पहल शुरू की गई है।
चेयरमैन पांडे ने स्पष्ट किया कि कई बार ये धोखाधड़ी वास्तव में गैर-निवेश संबंधी होती हैं। पीड़ितों को यह विश्वास दिलाया जाता है कि वे प्रतिभूति बाजार में निवेश कर रहे हैं। हालांकि, उनका पैसा कभी भी वास्तविक बाजार में प्रवेश नहीं करता है। ये फर्जीवाड़े अक्सर नकली मोबाइल एप और फर्जी व्यक्तियों द्वारा अंजाम दिए जाते हैं।
धोखाधड़ी करने वाले पैसा 'म्यूल खातों' के माध्यम से स्थानांतरित करते हैं। जब तक पीड़ित को सच्चाई का पता चलता है और वह साइबर पुलिस से संपर्क करता है, तब तक अक्सर बहुत देर हो चुकी होती है। निवेशकों को सबसे पहले यह जांचना चाहिए कि वे जिस इकाई से व्यवहार कर रहे हैं, वह विनियमित है या नहीं। उन्हें उस माध्यम को भी समझना चाहिए जिससे उनसे संपर्क किया जा रहा है।
धोखाधड़ी से कैसे बचें निवेशक?
सेबी ने निवेशकों की सुरक्षा के लिए कई सत्यापन उपकरण विकसित किए हैं। इनमें गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध सत्यापन सुविधा शामिल है। इसके अलावा, सेबी का अपना 'सेबी चेक' उपकरण भी निवेशकों के लिए उपलब्ध है। सबसे बड़ी चुनौती इन उपकरणों के बारे में आम जनता को जागरूक करना है। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि यह महत्वपूर्ण जानकारी सभी संभावित निवेशकों तक पहुंचे। निवेशकों को हमेशा सतर्क रहना चाहिए और किसी भी निवेश से पहले पूरी जांच-पड़ताल करनी चाहिए।
'प्रोजेक्ट जागरूक' क्या है और क्यों जरूरी है?
चेयरमैन पांडे ने 'प्रोजेक्ट जागरूक' के महत्व पर भी प्रकाश डाला। भारत में वर्तमान में करीब 15 करोड़ अद्वितीय निवेशक हैं। यह संख्या सालाना लगभग 20 फीसदी की दर से बढ़ रही है। नए और संभावित निवेशकों को सटीक जानकारी प्रदान करना एक बड़ी चुनौती है। उन्हें निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले सभी जोखिमों और अवसरों को समझना चाहिए। इसी उद्देश्य से 'प्रोजेक्ट जागरूक' का शुभारंभ किया गया है।
निवेशकों तक सही जानकारी कैसे पहुंचेगी?
निवेशक समुदाय बहुत विविध है। वे विभिन्न भारतीय भाषाएं बोलते हैं और कई जनसांख्यिकीय समूहों से आते हैं। इनमें युवा, वरिष्ठ नागरिक, वेतनभोगी कर्मचारी और सेवानिवृत्त व्यक्ति शामिल हैं। इसलिए, जागरूकता अभियान और शैक्षिक सामग्री उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप होनी चाहिए। इस प्रयास के तहत, सेबी ने एक व्हाट्सएप चैनल भी शुरू किया है। शुरुआत में यह चैनल केवल संदेश भेजने के लिए उपयोग होगा, लेकिन धीरे-धीरे इसे अधिक संवादात्मक बनाया जाएगा।