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SC: सुप्रीम कोर्ट ने एटी-1 बॉन्ड राइट ऑफ करने के मामले में नोटिस जारी किया, RBI ने की थी अपील

Fri, 03 Mar 2023 07:11 PM IST
विवेक दास बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Supreme Court: प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने रिजर्व बैंक की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और यस बैंक का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की दलीलों पर गौर किया और एटी-1 बांड को बट्टे खाते में डालने के फैसले को रद्द करने के उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक बढ़ा दी। 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उच्चतम न्यायालय ने यस बैंक के प्रशासकों के एटी-1 बॉन्ड को राइट ऑफ करने  में डालने के फैसले को खारिज करने के उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली अपीलों पर शुक्रवार को एक्सिस ट्रस्टी सर्विसेज लिमिटेड को नोटिस जारी किया।

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प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने रिजर्व बैंक की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और यस बैंक का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की दलीलों पर गौर किया और एटी-1 बॉन्ड को बट्टे खाते में डालने के फैसले को रद्द करने के उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक बढ़ा दी। 

बंबई उच्च न्यायालय ने यस बैंक प्रशासक के फैसले को रद्द करते हुए कहा था कि उसका फैसला स्थगित रहेगा इसलिए केंद्रीय बैंक और यस बैंक इसके खिलाफ शीर्ष अदालत में अपील कर सकते हैं।
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जानें क्या हैं एटी-1 बॉन्ड्स? 
AT-1 बॉन्ड यानी अडिशनल टीयर-1 बॉन्ड वे बॉन्ड थे जिन्हें यस बैंक की ओर से ग्राहकों को थमाया गया था। पैसा लगाने वालों में कुछ बड़े म्यूचुअल फंड हाउस थे। जो आम लोगों का ही पैसा निवेश करते हैं। बहुत से लोगों ने अपने रिटायरमेंट फंड का बड़ा हिस्सा इसमें लगा दिया था। 2020 आते-आते यस बैंक के कर्जे डूबने लगे। बैंक पूरी तरह तबाह न हो जाए इसके लिए इस मामले में रिजर्व बैंक ने दखल दिया।

फैसला हुआ कि यस बैंक के एटी-1 बॉन्ड को हमेशा के लिए बट्टे खाते में डाल कर बैलेंस शीट से बाहर कर दिया जाए। यानी बॉन्ड के निवेशकों को एक पैसा नहीं मिलेगा। यह सदमे की तरह था। इसके बाद बॉन्ड होल्डरों ने केस दायर कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि बैंक के लोगों ने इस बॉन्ड के रिस्क के बारे में नहीं बताया। इसे बुजुर्गों को धोखे से बेच दिया गया। उन्हें बताया गया कि इसमें फिक्स्ड डिपॉजिट से ज्यादा रिटर्न मिलेगा। सेबी की जांच में भी पाया गया कि इन बॉन्ड्स को गलत तरीके से बेचा गया था। इसी मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने 8415 करोड़ रुपये बट्टे खाते में डालने के बैंक के फैसले पर रोक लगाने का फैसला दिया था। 

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