Supreme Court: मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एमआर शाह की पीठ ने कहा कि सीएमएम का आदेश "त्रुटिपूर्ण" और "अस्थिर" था। पीठ ने कहा, ''हमारा मानना है कि आरोपी को जमानत देने का सीएमएम का आदेश स्पष्ट रूप से त्रुटिपूर्ण था।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को जेल में बंद यूनिटेक के पूर्व प्रमोटरों संजय चंद्रा और अजय चंद्रा को निर्देश दिया कि वे घर खरीदारों के धन की कथित हेराफेरी से संबंधित मामलों में जमानत या अन्य राहत के लिए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाएं। शीर्ष अदालत ने पटियाला हाउस अदालत के मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट (सीएमएम) के 13 जनवरी, 2021 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत उन्हें जमानत दी गई थी।
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शीर्ष अदालत ने 18 मार्च, 2021 को सीएमएम के आदेश पर रोक लगा दी थी और दोनों को 22 मार्च, 2021 को या उससे पहले तिहाड़ जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था। चंद्रा बंधु फिलहाल शीर्ष अदालत के निर्देश पर मुंबई की दो अलग-अलग जेलों में बंद हैं।
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एमआर शाह की पीठ ने कहा कि सीएमएम का आदेश "त्रुटिपूर्ण" और "अस्थिर" था। पीठ ने कहा, ''हमारा मानना है कि आरोपी को जमानत देने का सीएमएम का आदेश स्पष्ट रूप से त्रुटिपूर्ण था। हम तदनुसार 13 जनवरी, 2021 के आदेश को रद्द करते हैं। आरोपियों ने बाद में आत्मसमर्पण कर दिया। उन्हें इस अदालत में जाने की स्वतंत्रता दी जाती है यदि वे जमानत के लिए आवेदन करना चाहते हैं या उचित निर्देश चाहते हैं।"
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सुनवाई के दौरान चंद्रा परिवार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने कहा कि वे अपने खिलाफ कथित अपराधों के लिए अब तक पांच साल से अधिक समय तक हिरासत में बिता चुके हैं। उन्होंने कहा कि चंद्रा बंधुओं ने शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री में 750 करोड़ रुपये जमा करने के लिए इस अदालत की ओर से निर्धारित शर्त को भी पूरा किया है और इसलिए उन्हें नियमित जमानत दी जानी चाहिए।