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रिपोर्ट: मार्च तिमाही में 1.3 फीसदी रहेगी GDP की वृद्धि दर, 2020-21 में इतनी गिरावट का अनुमान

Tue, 25 May 2021 03:59 PM IST
‌डिंपल अलावाधी पीटीआई, नई दिल्ली

सार

एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट इकोरैप में अनुमान लगाया गया है कि मार्च तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर 1.3 फीसदी रहेगी और पिछले वित्त वर्ष 2020-21 में अर्थव्यवस्था में करीब 7.3 फीसदी की गिरावट आने का अनुमान है।
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भारतीय अर्थव्यवस्था - फोटो : pixabay
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विस्तार
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देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर बीते वित्त वर्ष 2020-21 की चौथी तिमाही में 1.3 फीसदी रहेगी। एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट इकोरैप में यह अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बीते पूरे वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था में करीब 7.3 फीसदी की गिरावट आने का अनुमान है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) मार्च तिमाही तथा 2020-21 के लिए जीडीपी का शुरुआती अनुमान 31 मई को जारी करेगा।

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पहले पूरे वित्त वर्ष में 7.4 फीसदी की गिरावट का था अनुमान 
आगे रिपोर्ट में कहा गया है कि, 'हमारे नाउकास्टिंग मॉडल के अनुसार चौथी तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर 1.3 फीसदी रहने का अनुमान है। एनएसओ ने चौथी तिमाही में एक फीसदी की गिरावट का अनुमान लगाया है।' रिपोर्ट में कहा गया है कि पूरे वित्त वर्ष 2020-21 में जीडीपी में करीब 7.3 फीसदी की गिरावट का अनुमान है। पहले उसने पूरे वित्त वर्ष में 7.4 फीसदी की गिरावट का अनुमान लगाया था।

41 उच्च चक्रीय संकेतकों पर आधारित है नाउकास्टिंग मॉडल
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने स्टेट बैंक इंस्टिट्यूट ऑफ लीडरशिप (एसबीआईएल), कोलकाता के साथ सहयोग में 'नाउकास्टिंग मॉडल' विकसित किया है, जो औद्योगिक गतिविधि, सेवा गतिविधि और वैश्विक अर्थव्यवस्था के 41 उच्च चक्रीय संकेतकों पर आधारित है।
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25 देशों में पांचवीं सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होगा भारत 
रिपोर्ट में कहा गया है कि 1.3 फीसदी की वृद्धि दर के अनुमान के आधार पर भारत 25 देशों में पांचवीं सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होगा। इन 25 देशों ने ही अपने जीडीपी के आंकड़े जारी किए हैं।

महामारी में ज्यादा दाम पर सामान बेच रहे ऑनलाइन स्टोर
इससे पहले एसबीआई रिसर्च ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि कोरोना महामारी में एक तरफ जहां ग्राहक ज्यादातर खरीदारी ऑनलाइन कर रहे, वहीं मौके का फायदा उठाते हुए ग्रोफर्स, नेचर बास्केट, लिशियस जैसे प्लेटफॉर्म ने उत्पाद अधिक दाम पर बेचने शुरू कर दिए हैं। अधिकतर ऑनलाइन स्टोर्स ने महामारी के दौरान डिस्काउंट में बड़ी कटौती कर दी है।

रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना से पहले ऑनलाइन स्टोर्स पर बिकने वाले उत्पादों के दाम उनके अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से काफी कम होते थे, क्योंकि फिजिकल स्टोर्स से प्रतिस्पर्धा और ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए ज्यादा डिस्काउंट दिए जाते थे। अब संक्रमण के डर और लॉकडाउन से ज्यादातर ग्राहकों ने ऑनलाइन खरीदारी शुरू कर दी है, जिससे स्टोर्स ने भी डिस्काउंट में कटौती कर दी है।

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