पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव से प्रभावित भारतीय कारोबारों को राहत देने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय कैबिनेट ने 2.55 लाख करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी है। इस दिशा में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने मोर्चा संभालते हुए अपने ग्राहकों को 80,000 करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त वर्किंग कैपिटल लोन देने की रूपरेखा तैयार कर ली है।
एसबीआई के चेयरमैन सीएस शेट्टी ने जानकारी दी है कि बैंक के पास पात्र ग्राहकों का डेटाबेस पहले से ही मौजूद है। गाइडलाइंस जारी होने के बाद, बैंक के ग्राहकों के लिए 70,000 से 80,000 करोड़ रुपये की ऋण सुविधा उपलब्ध है। शेट्टी ने इस योजना को एक सक्रिय उपाय बताते हुए कहा कि तकनीकी रूप से यह सुविधा सभी के लिए उपलब्ध है, भले ही हर कोई इसका लाभ न ले। एसबीआई के एक व्यापक आकलन के अनुसार, पूरे बैंकिंग सिस्टम में 1.1 करोड़ से अधिक लाभार्थी इस योजना का लाभ उठाने की क्षमता रखते हैं।
पश्चिम एशिया संकट का असर कई उद्योगों पर देखा जा रहा है, जिससे निपटने के लिए योजना का नया ढांचा तैयार किया गया है:
योजना को तेजी से लागू करने के लिए जन समर्थ पोर्टल के माध्यम से डिजिटल प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। एसबीआई चेयरमैन को उम्मीद है कि बोर्ड की मंजूरी और अन्य परिचालन संबंधी मुद्दों को अगले 8-10 दिनों में पूरी तरह से सुलझा लिया जाएगा। सचिव नागराजू ने यह भी स्पष्ट किया कि योजना का कुल आकार बैंकों के मौजूदा जोखिम और प्रभावित सेक्टर्स की संभावित मांग के आधार पर ही निर्धारित किया गया है।