भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने सभी अवधियों में अपनी सीमांत लागत आधारित उधार दर (एमसीएलआर) में 25 आधार अंकों (बीपीएस) की वृद्धि की है। बैंक की वेबसाइट के अनुसार नई एमसीएलआर दरें 15 अक्टूबर 2022 से प्रभावी होंगी।
नवीनतम दर वृद्धि के बाद एमसीएलआर एक रात, एक महीने और तीन महीने के कार्यकाल के लिए 7.35 प्रतिशत से बढ़कर 7.60 प्रतिशत हो गया है। छह महीने के कार्यकाल के लिए एमसीएलआर 7.65 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.90 प्रतिशत कर दिया गया है। एक साल के कार्यकाल के लिए एमसीएलआर 7.70 फीसदी से बढ़कर 7.95 फीसदी हो गया है। दो साल के कार्यकाल के लिए एमसीएलआर 7.90 प्रतिशत से बढ़ाकर 8.15 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि तीन साल के कार्यकाल के लिए एमसीएलआर को संशोधन के बाद 8 प्रतिशत से बढ़ाकर 8.25 प्रतिशत कर दिया गया है।
साभारः एसबीआई वेबसाइट
क्या है MCLR?
अप्रैल 2016 से ऋण के लिए लिए जाने वाले ब्याज की जगह बैंकों में एमसीएलआर का इस्तेमाल शुरू हुआ। आप जब किसी बैंक से कर्ज लेते हैं तो बैंक की ओर से वसूली जाने वाली ब्याज की न्यूनतम दर को आधार दर या एमसीएलआर (marginal cost of funds-based lending rate) कहा जाता है। आधार दर से कम दर पर बैंक किसी को लोन जारी नहीं कर सकता। इसी आधार दर की जगह पर अब बैंक एमसीएलआर का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसकी गणना बैंक धनराशि की सीमांत लागत, आवधिक प्रीमियम, संचालन खर्च और नकदी भंडार अनुपात को बनाए रखने की लागत के आधार पर करते हैं। आगे चलकर इसी गणना के आधार पर लोन दिया जाता है। यह आधार दर से सस्ता होता है। इसके लागू होने के बाद से बीते कुछ वर्षों में होम लोन जैसे ऋण भी काफी सस्ते हुए हैं।