एसबीआई ने अपनी शोध रिपोर्ट ‘इकोरैप’ में कहा, आरबीआई और एनएसओ के अनुमानों के बीच का अंतर हमेशा ही 0.20-0.30 फीसदी की सीमा में रहता आया है। लिहाजा, चालू वित्त वर्ष के लिए 6.4 फीसदी का अनुमान उचित है। हालांकि, इस अवधि में वृद्धि दर नीचे की ओर झुकाव के साथ 6.3 फीसदी रह सकती है।
एसबीआई का दावा है कि आर्थिक वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष 2024-25 में राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के अनुमान से भी कम करीब 6.3 फीसदी रह सकती है। एनएसओ ने एक दिन पहले ही 2024-25 में जीडीपी की वृद्धि दर चार साल के निचले स्तर 6.4 फीसदी पर रहने का अनुमान जताया है। एसबीआई ने अपनी शोध रिपोर्ट ‘इकोरैप’ में कहा, आरबीआई और एनएसओ के अनुमानों के बीच का अंतर हमेशा ही 0.20-0.30 फीसदी की सीमा में रहता आया है। लिहाजा, चालू वित्त वर्ष के लिए 6.4 फीसदी का अनुमान उचित है। हालांकि, इस अवधि में वृद्धि दर नीचे की ओर झुकाव के साथ 6.3 फीसदी रह सकती है। आरबीआई ने विकास दर 6.6% रहने का अनुमान जताया है।
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सरकारी खर्च में कटौती से घटेगा राजकोषीय घाटा
बजट अनुमान के अनुरूप कर प्राप्तियां बढ़ीं और सरकारी खर्च कम हुआ, तो चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा 4.9 फीसदी रहेगा। सरकार 16.1 लाख करोड़ के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य पर कायम रहती है तो यह पांच फीसदी पर रहेगा।
सरकारी खपत व निर्यात का सकारात्मक योगदान
रिपोर्ट में कहा गया है कि जीडीपी का पहला अग्रिम अनुमान 2024-25 में समग्र मांग में सुस्ती को दर्शाता है। हालांकि, सकारात्मक योगदान देने वाले घटकों में सरकारी खपत शामिल है, जिसमें मौजूदा कीमतों के संदर्भ में 8.5 फीसदी वृद्धि हुई है। निर्यात में भी आठ फीसदी की तेजी रही है।