पश्चिम एशिया में इस्राइल और ईरान के बीच जारी युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा और वित्तीय बाजारों को गहरे संकट में धकेल दिया है। सोमवार को जहां भारतीय शेयर बाजार में आठ लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए, वहीं सऊदी अरब की प्रमुख रिफाइनरी पर ड्रोन हमले और गैस (एलएनजी) की कीमतों में भारी उछाल की चेतावनी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। आइए सवाल-जवाब के जरिए समझते हैं कि इस वैश्विक आर्थिक भूचाल के क्या मायने हैं और भारत अपनी अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए क्या रणनीति अपना रहा है।
ईरान द्वारा किए गए ड्रोन हमलों के बाद सऊदी अरब की दिग्गज तेल कंपनी 'सऊदी अरामको' ने अपनी 'रास तनूरा' रिफाइनरी का संचालन एहतियातन रोक दिया है। 550,000 बैरल प्रतिदिन की क्षमता वाली यह रिफाइनरी मिडिल ईस्ट की सबसे बड़ी रिफाइनरियों में से एक है और सऊदी क्रूड के लिए एक महत्वपूर्ण निर्यात टर्मिनल है। इन हमलों और 'होर्मुज जलडमरूमध्य' में जहाजों की आवाजाही रुकने के कारण सोमवार को ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स में करीब 10% का भारी उछाल दर्ज किया गया।
कच्चे तेल के साथ-साथ अब वैश्विक गैस बाजार पर भी बड़ा खतरा मंडरा रहा है। 'गोल्डमैन सैक्स' की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए गैस की सप्लाई बाधित होने से एशिया और यूरोप में स्पॉट एलएनजी की कीमतें 130% तक उछल सकती हैं। विश्लेषकों का अनुमान है कि यदि सप्लाई एक महीने के लिए भी रुकती है, तो कीमतें 25 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू तक पहुंच जाएंगी। कतर और यूएई के जहाजों में हो रही देरी और इस्राइल की ओर से अपने समुद्री गैस क्षेत्रों से उत्पादन कम करने के कारण यह स्थिति बनी है।
युद्ध और ऊर्जा संकट की अनिश्चितता के कारण सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में ऐतिहासिक बिकवाली देखी गई। बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स 2,700 से अधिक अंक टूट गया और निफ्टी 25,000 के अहम सपोर्ट लेवल से नीचे आ गया। बाजार खुलते ही घबराए निवेशकों के करीब 7.8 लाख करोड़ रुपये डूब गए। 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1048.34 अंक या 1.29 प्रतिशत गिरकर 80,238.85 पर बंद हुआ। 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 312.95 अंक या 1.24 प्रतिशत गिरकर 24,865.70 पर बंद हुआ।
बाहरी झटकों से अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए भारत कूटनीतिक तरीके अपना रहा है। इसी रणनीति के तहत, हालिया ऐतिहासिक करार हुए हैं। ये समझौते भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया के हालात पर गहरी चिंता जताते हुए स्पष्ट किया है कि भारत शांति का पक्षधर है और सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
सऊदी अरामको पर हमले और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा से वैश्विक स्तर पर एक बार फिर महंगाई दर और सप्लाई चेन संकट का खतरा बढ़ गया है। हालांकि, कनाडा के साथ भारत के नए ऊर्जा और व्यापारिक समझौते यह दर्शाते हैं कि सरकार भविष्य के ऊर्जा जोखिमों को लेकर सतर्क है। मौजूदा वैश्विक अनिश्चितता और उच्च कमोडिटी कीमतों के बीच निवेशकों को बाजार में सुरक्षित और बेहद सतर्क रुख अपनाने की जरूरत है।