कर विवादों के निपटारे के लिए शुरू की गई सबका विश्वास विरासत विवाद समाधान योजना बेहद सफल रही है। 15 जनवरी, 2020 को समाप्त हुई योजना की अवधि तक सरकार को कुल 14,821 करोड़ रुपये के राजस्व की प्राप्ति हुई है। योजना की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस दौरान कुल 1,89,229 घोषणा-पत्र दाखिल किए गए।
सबका विश्वास योजना-2019 की भारी सफलता के विश्लेषणों से कई सबक और सीख भी मिलती हैं, जिसका उपयोग भावी योजना में किया जा सकेगा। इस सफलता का सबसे बड़ा श्रेय करदाताओं को दी गई 70 फीसदी तक की भारी छूट को जाता है।
यह इस सिद्धांत को भी मजबूती प्रदान करता है कि भारत जैसे विकासशील देश में अगर कर की दरें कम होंगी तो उसका अनुपालन बेहतर होगा। दूसरी बड़ी सीख योजना के तहत 27 हजार से अधिक घोषणा पत्रों का स्वैच्छिक प्रकटीकरण है। यानी सात में से एक घोषणा स्वैच्छिक रही है।
वैसे तो स्वैच्छिक प्रकटीकरण को कर रियायत नहीं मिलती है, लेकिन दंड, ब्याज और अभियोजन से पूरी तरह छूट दी गई। योजना में यह प्रावधान किया गया कि प्रकटीकरण को बिना किसी सवाल के स्वीकार किया जाएगा। करदाताओं में स्वैच्छिक प्रकटीकरण को लेकर भरोसा सरकार के भयमुक्त और विश्वसनीय वादे के बाद ही जगा है।
योजना की सफलता के पीछे इसकी व्यावहारिक रूपरेखा के अलावा केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमाशुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) की भी अहम भूमिका रही। बोर्ड ने सिर्फ निपुणतापूर्वक योजना का संचालन किया, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था और अधिकारियों में समर्पण की भावना को भी जगाए रखा।
अधिकारियों-कर्मचारियों की दिनरात की गई मेहनत का नतीजा ही योजना की सफलता को दर्शाता है। यहां व्यापार एवं उद्योग जगत की भूमिका को भी कमतर नहीं आंका जा सकता, जिसने योजना का उचित अभिमूल्यन किया और लाभ लेकर परिपक्वता एवं विवेक का परिचय दिया। भारतीय व्यवसाय, व्यापार और उद्योग जगत अपनी भूमिकाओं के लिए प्रशंसा के पात्र हैं।