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GDP: एसएंडपी ने मजबूत घरेलू मांग के कारण भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.5% पर बरकरार रखा, जानें सबकुछ

Tue, 23 Sep 2025 01:29 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

रेटिंग एजेंसी एसएंडपी को इस वित्त वर्ष में आरबीआई की ओर से 25 आधार अंकों की कटौती की उम्मीद है। एजेंसी ने चालू वित्त वर्ष के लिए मुद्रास्फीति के अपने पूर्वानुमान को घटाकर 3.2 प्रतिशत कर दिया है। अप्रैल-जून तिमाही में भारत की जीडीपी 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी। चालू वित्तीय वर्ष के लिए एजेंसी ने 6.5% की वृद्धि दर का अनुमान जताया है। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।
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भारतीय अर्थव्यवस्था। - फोटो : amarujala
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विस्तार
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एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने मंगलवार को चालू वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा। रेटिंग एजेंसी ने मोटे तौर पर अनुकूल रहे मानसून के बीच मजबूत घरेलू मांग का हवाला देते हुए यह अनुमान लगाया है।

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एसएंडपी ने यह भी कहा कि उसे इस वित्त वर्ष में आरबीआई की ओर से 25 आधार अंकों की कटौती की उम्मीद है। एजेंसी ने चालू वित्त वर्ष के लिए मुद्रास्फीति के अपने पूर्वानुमान को घटाकर 3.2 प्रतिशत कर दिया है। अप्रैल-जून तिमाही में भारत की जीडीपी 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी।

एसएंडपी ने एक बयान में कहा, "हमारा अनुमान है कि इस वित्त वर्ष (31 मार्च, 2026 को समाप्त होने वाला वर्ष) में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत पर स्थिर रहेगी। हमारा अनुमान है कि घरेलू मांग मजबूत बनी रहेगी, जिसे मोटे तौर पर सौम्य मानसून, आयकर और वस्तु एवं सेवा कर में कटौती तथा सरकारी निवेश में तेजी से मदद मिलेगी।"
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एसएंडपी ने कहा कि खाद्य मुद्रास्फीति में अपेक्षा से अधिक कमी से चालू वर्ष में मुद्रास्फीति को कम रखने में मदद मिलेगी। एसएंडपी ने कहा, "इससे मौद्रिक नीति में और अधिक समायोजन की गुंजाइश बनती है, तथा हमारा अनुमान है कि इस वित्तीय वर्ष में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की कटौती की जाएगी।"

एसएंडपी ने अपनी रिपोर्ट 'एशिया-प्रशांत तिमाही 4 2025: बाह्य दबाव से विकास में कमी' में कहा कि पूरे क्षेत्र में अपेक्षाकृत लचीली घरेलू मांग से अमेरिकी आयात शुल्क में वृद्धि और धीमी वैश्विक वृद्धि के बाद मजबूत बाह्य प्रतिकूल परिस्थितियों का प्रभाव कम हो जाएगा।

विभिन्न एशियाई अर्थव्यवस्थाओं से आयात पर अमेरिकी टैरिफ उनके निर्यात परिदृश्य तथा क्षेत्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं में उनकी भूमिका दोनों को आकार देंगे। एसएंडपी ने कहा, "अमेरिकी टैरिफ पर हमारी जून की धारणाओं के सापेक्ष, चीन का प्रदर्शन अब तक अन्य एशियाई अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में कुछ बेहतर रहा है, और दक्षिण-पूर्व एशियाई उभरते बाजारों का प्रदर्शन कुछ हद तक खराब रहा है। भारत पर अनुमान से कहीं ज्यादा बुरा असर पड़ा है।"

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