एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स का मानना है कि केंद्र सरकार अगर देश के राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के चार फीसदी तक लाने में सक्षम रहती है तो अगले 24 महीनों में भारत की सॉवरेन रेटिंग बढ़ सकती है। रेटिंग एजेंसी के निदेशक (सॉवरेन रेटिंग्स) यीफार्न फुआ ने बुधवार को कहा, केंद्र और राज्यों का राजकोषीय घाटा जीडीपी के सात फीसदी से कम होना चाहिए। इसमें ज्यादा योगदान केंद्र का होना चाहिए। रेटिंग एजेंसी ने इसी साल मई में रेटिंग को 'बीबीबी-' पर बरकरार रखते हुए भारत के लिए आउटलुक को स्थिर से बढ़ाकर सकारात्मक कर दिया था।
6.8 फीसदी रह सकती है जीडीपी की वृद्धि दर
केंद्र सरकार का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा 5.63 फीसदी से कम होकर 5.1 फीसदी पर आ जाएगा। सरकारी खर्च व राजस्व के बीच का अंतर 2025-26 तक और घटकर 4.5 फीसदी के स्तर पर आ सकता है। एसएंडपी का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष यानी 2024-25 में भारत की आर्थिक वृद्धि 6.8 फीसदी रहेगी, जो पिछले वित्त वर्ष के 8.2 फीसदी से कम है।