अर्थव्यवस्था को एक और झटका देने वाली खबर आई है। देश के ग्रामीण इलाकों में उपभोक्ता वस्तुओं की मांग में पिछले चार दशकों की सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली है। इससे लगता है कि अभी अर्थव्यवस्था को सुधरने में काफी समय लगेगा और सरकार को भी मांग बढ़ाने के लिए कई सुधारों पर काम करना होगा।
एक अंग्रेजी अखबार ने राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) कीएक रिपोर्ट के हवाले से बताया है कि भारत के गांवों में उपभोक्ता वस्तुओं की मांग में 8.8 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है। वित्त वर्ष 2017-18 में उपभोक्ता खर्च में 3.7 फीसदी की कमी दर्ज की गई। यह इसलिए बड़ी बात है, क्योंकि बीते चार दशक में पहली बार यह कमी देखने को मिली है। सर्वेक्षण के मुताबिक, उपभोगव्यय में कमी से संकेत मिलते हैं कि देश में गरीबी से प्रभावित लोगों की संख्या बढ़ रही है।
आर्थिक मामलों के एक विशेषज्ञ ने कहा, ‘कम से कम बीते पांच दशक के दौरान ऐसा कभी नहीं हुआ, जब एक अवधि के दरान रियल टर्म में उपभोक्ता व्यय में कमी दर्ज की गई हो। ये डाटा संकेत करते हैं कि देश में गरीबी के स्तर में खासा इजाफा हुआ है। इन आंकड़ों से जाहिर होता है कि गरीबी में कम से कम 10 फीसदी अंकों का इजाफा हुआ है।’
विशेषज्ञों के मुताबिक, एक चिंता की बड़ी बात यह भी है कि एनएसओ के सर्वेक्षण में पहली बार एक दशक में खाद्य पदार्थों की खपत में गिरावट दर्ज की गई है, जो देश में कुपोषण बढ़ने की ओर भी इशारा करती है।
सर्वे के मुताबिक, 2017-18 के दौरान गांवों में खाने पर प्रति व्यक्ति खर्च महज 580 रुपये प्रति महीना रहा, जो 2011-12 (रियल टर्म में) के 643 रुपये की तुलना में 10 फीसदी कम था। वहीं शहरी इलाकों में 2017-18 में प्रति व्यक्ति खर्च 946 रुपये महीना रहा। इस प्रकार शहरी इलाकों में वृद्धि स्थिर बनी हुई है।