भारतीय रुपये में मंगलवार कमजोरी देखने को मिली और यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 35 पैसे गिरकर 93.88 (प्रावधिक) पर बंद हुआ। वैश्विक बाजार में डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, जिसका असर रुपये पर पड़ा।
फॉरेक्स कारोबारियों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते अनिश्चितता बढ़ी है, जिसके कारण विदेशी निवेशकों की निकासी तेज हुई है। विदेशी फंड के बाहर जाने और महंगे कच्चे तेल ने मिलकर रुपये पर दबाव बनाया है। सोमवार को रुपया पहली बार अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94 के स्तर को पार कर गया, लेकिन अंत में 93.53 पर स्थिर बंद हुआ।
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के ट्रेजरी प्रमुख और कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली ने कहा कि लगातार विदेशी निवेश निधि (एफपीआई) की निकासी से रुपये पर दबाव बना हुआ है। मजबूत अमेरिकी डॉलर उभरते बाजारों की मुद्राओं को कमजोर बनाए हुए है, और इस महीने रुपये में लगभग 4.5 प्रतिशत की गिरावट आई है। बुधवार को रुपये का दायरा 93.65 से 94.25 के बीच रहने की उम्मीद है।
ट्रंप ने सोमवार को कहा कि अमेरिका एक सम्मानित ईरानी नेता से बातचीत कर रहा है और दावा किया कि इस्लामिक गणराज्य युद्ध को समाप्त करने के लिए एक समझौते के लिए उत्सुक है। उन्होंने ईरान को महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य को फिर से खोलने या अपने बिजली संयंत्रों पर हमलों का सामना करने के लिए दी गई समय सीमा को भी बढ़ा दिया, और कहा कि उसके पास अतिरिक्त पांच दिन हैं। हालांकि, ईरान द्वारा ट्रंप के दावों का खंडन और क्षेत्र में जारी शत्रुता ने अनिश्चितता पैदा कर दी, जिससे वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गईं।