एक ओर जहां छह दिनों की गिरावट के बाद लगातार दो दिनों से शेयर बाजार में तेजी है, तो वहीं भारतीय मुद्रा रुपये में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीते दिनों अपने सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंचने के बाद से इसमें लगातार कमी आ रही है। मंगलवार को डॉलर के मुकाबले रुपया नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। खबर लिखे जाने तक रुपये 14 पैसे की गिरावट के साथ 77.69 पर पहुंच गया था।
तेजी से टूट रही भारतीय मुद्रा
इससे पहले नौ मई 2022 को भारतीय मुद्रा में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। जब यह डॉलर के मुकाबले 52 पैसे टूटकर 77.42 के स्तर पर आ गया था। इसके बाद से इसमें गिरावट और बढ़ी और बीते शुक्रवार को यह लाइफटाइम लो स्तर 77.55 पर पहुंच गया था। इसके बाद अब इसमें एक बार फिर से बड़ी गिरावट आई है और यह रिकॉर्ड निचले स्तर पर लुढ़कर डॉलर के मुकाबले 77.69 पर आ गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, मजबूत डॉलर इंडेक्स, रिस्क-ऑफ सेंटिमेंट और विदेशी फंड के बहिर्वाह से रुपये में साप्ताहिक आधार पर 65 पैसे की गिरावट आ चुकी है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से उठाए जा रहे कदमों के चलते रुपये में गिरावट सीमित दायरे में रहने का अनुमान है।
फॉरेक्स रिजर्व में भी गिरावट जारी
बता दें कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी लगातार कम होता जा रहा है, यह बीते दिनों घटकर पहली बार 600 अरब डॉलर से नीचे पहुंच गया था। लगातार नौ हफ्ते से इसमें गिरावट दर्ज की जा रही है। बीती 29 अप्रैल को समाप्त हुए सप्ताह में फॉरेक्स रिजर्व 2.695 अरब डॉलर घटकर 597.73 अरब डॉलर रह गया है। जबकि छह मई को समाप्त हुए सप्ताह में इसमें और भी गिरावट आई और यह 595.954 अरब डॉलर रह गया है। इस दौरान एफसीए 1.968 अरब डॉलर घटकर 530.855 अरब डॉलर रह गया।
आम आदमी पर होगा बड़ा असर
डॉलर के मुकाबले रुपये के सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंचने के देश की अर्थव्यवस्था पर चौतरफा असर पड़ेगा। इसकी सबसे ज्यादा मार आयात बिल पर पड़ेगी क्योंकि भारत अपनी जरूरतों का करीब 80 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में रुपये की गिरावट से कच्चे तेल के आयात बिल में बढ़ोतरी होगी और विदेशी मुद्रा ज्यादा खर्च होगी। इसके अलावा, लगातार बढ़ रही महंगाई के मोर्चे पर भी मुश्किलें और बढ़ेंगी। साथ ही उर्वरक और रसायन जिनका कि भारत बड़ा आयातक है वो रुपये की कमजोरी से महंगे हो जाएंगे। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक सामानों से लेकर आभूषण तक महंगे हो जाएंगे।
विदेश में बच्चों को पढ़ाना और घूमना होगा महंगा
दरअसल, कच्चे तेल, सोना और अन्य धातुओं की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर में तय होती हैं। ऐसे में दिनों-दिन रुपये की बिगड़ रही हालत से इनकी खरीद के लिए हमें ज्यादा विदेशी मुद्रा खर्च करना पड़ेगा। घरेलू बाजार में भी पेट्रोल-डीजल की कीमतें भी बढ़ेंगी। वहीं रुपये में गिरावट से भारतीयों के लिए विदेश में पढ़ाई करना और घूमना महंगा हो जाएगा। घरेलू मुद्रा में इस बड़ी गिरावट से विदेश में अब समान शिक्षा के लिए पहले की तुलना 15 से 20 फीसदी ज्यादा खर्च करना पड़ेगा।