कारोबार करने में सुगमता लाने के सरकारी दावों के बीच ताजे सरकारी आंकड़ों ने ही विरोधाभासी तस्वीर तैयार कर दी है। सरकार के आंकड़े बता रहे हैं कि बीते 6 सालों में देश में लगभग 41 हजार कंपनियों ने दिवालिया होने का आवेदन दिया है। इधर तो 6 महीने में ही उनका आंकड़ा 2,500 के करीब पहुंच गया है। भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूडी की ओर से पूछे गए एक सवाल के जवाब में सोमवार को संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसकी जानकारी दी। संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार से ही शुरू हुआ और पहले दिन सरकार से कंपनियों के दिवालिया आवेदन को लेकर सवाल पूछे गए।
केंद्रीय मंत्री की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड 2016 के तहत वित्त वर्ष 2018-19 से अब तक 40,943 मामले सामने आए हैं। यानी इस दौरान करीब 41 हजार कंपनियों ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) के पास इनसॉल्वेंसी के लिए आवेदन किया है। उन्होंने अपने जवाब में बताया कि चालू वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 30 सितंबर 2024 तक का है।
इस वित्त वर्ष में अब तक आए 2,336 आवेदन
आंकड़ों के अनुसार, एनसीएलटी के पास वित्त वर्ष 2018-19 में इनसॉल्वेंसी के 9,243 आवेदन आए थे। उसके बाद अगले वित्त वर्ष में यानी 2019-20 में आंकड़ा बढ़कर 12,373 पर पहुंच गया था। वित्त वर्ष में एनसीएलटी के पास 3,392 कंपनियां और 2021-22 में 4,855 कंपनियां दिवाला शोधन के लिए पहुंची थीं। इनसॉल्वेंसी के लिए अप्लाई करने वाली कंपनियों का आंकड़ा 2022-23 में 4,730 और 2023-24 में 4,014 रहा था। वहीं चालू वित्त वर्ष के दौरान पहले 6 महीने में एनसीएलटी के पास 2,336 कंपनियां इनसॉल्वेंसी के लिए पहुंची हैं।
कर्ज नहीं चुकाने पर एनसीएलटी में जाता है मामला
कोई कंपनी इनसॉल्वेंसी के लिए तब जाती है, जब वह अपने कर्ज को चुकाने में सक्षम नहीं रह जाती हैं। इसका मतलब हुआ कि कंपनी ने कर्ज चुकाने से हाथ खड़े कर दिए हैं। ऐसे मामलों में कर्जदार और कर्जदाता के बीच विवाद हल करने और कर्जदाताओं के लिए ज्यादा से ज्यादा रिकवरी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सरकार ने आईबीसी कानून बनाया है।
इतने मामलों में कर्जदाताओं को हुई रिकवरी
केंद्रीय मंत्री ने जवाब में आगे बताया कि इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी बोर्ड ऑफ इंडिया (आईबीबीआई) के तिमाही न्यूजलेटर में सेक्टर वाइज आंकड़े दिए गए हैं। सरकार के पास इस तरह का कोई आंकड़ा नहीं रहता है। मंत्री ने सितंबर 2024 तक सुलझा दिए गए मामलों की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 1,068 मामलों में कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस को पूरा किया गया, जिनमें कर्जदाताओं को कुल 3,55,374।74 करोड़ रुपये प्राप्त हुए।