मनी लॉन्ड्रिंग के मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच एजेंसी- प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रेलिगेयर फिनवेस्ट लिमिटेड (आरएफएल) और अन्य कंपनियों की 124 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की है। धन शोधन यानी मनी लॉन्ड्रिंग निवारण कानून (पीएमएलए) के तहत जारी आदेश के तहत कुर्क की गई संपत्तियां, गुरुग्राम और दिल्ली के 'पॉश' इलाके में की गईं। अटैच संपत्तियां भूमि और फार्म हाउस के रूप में हैं।
कई बड़ी कंपनियों पर दर्ज हैं मामले, ईडी कर रही जांच
केंद्रीय एजेंसी ने बताया कि संपत्तियां आरएस इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड, केनवुड मर्केंटाइल प्रा. लिमिटेड, मैसर्स गुडफेथ बिल्डर्स प्रा. लिमिटेड और अन्य कंपनियों के हैं। संपत्तियों की कुल कीमत 124.57 करोड़ रुपये है। केनवुड मर्केंटाइल प्रा. लिमिटेड और गुडफेथ बिल्डर्स प्रा. लिमिटेड, एम3एम समूह से जुड़ी कंपनियां हैं। एम3एम गुरुग्राम की रियल एस्टेट कंपनी है।
430 करोड़ की संपत्ति अटैच, कानून के तहत अपराध की आय
जांच के दौरान गुरुग्राम और फरीदाबाद में 430 एकड़ जमीन को अटैच किया गया है। जांच एजेंसी के मुताबिक कानून के तहत इसे अपराध की आय माना जा रहा है। ईडी का आरोप है कि एम3एम इंडिया होल्डिंग्स नाम की एक पार्टनरशिप फर्म में रूप कुमार बंसल, बसंत बंसल, आभा बंसल और पंकज बंसल नाम के साझेदार हैं। इन्होंने शेयरों की बिक्री दिखाकर 500 करोड़ रुपये से अधिक की अपराध की आय जमा की।
करोड़ों की संपत्ति दो-तीन साल पहले भी हुई अटैच
ईडी ने इस मामले में अब तक तीन आरोप पत्र दायर किए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक रेलिगेयर फिनवेस्ट लिमिटेड के कॉर्पोरेट लोन बुक धोखाधड़ी के माध्यम से आपराधिक आय को जब्त करने के लिए पहले भी संपत्तियों को जब्त किया गया है। जांच के दायरे में शामिल आरएस इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड की संपत्ति 54 करोड़ रुपये और मालविंदर मोहन सिंह की संपत्ति 1,50,00,000 अमेरिकी डॉलर है। 2020 और 2021 में इनकी संपत्ति कुर्क की गई थी।