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अपना पैसा : डेट म्यूचुअल फंड में सुरक्षा के साथ रिटर्न 

Mon, 02 Jul 2018 11:07 AM IST
आशुतोष बिश्नोई, प्रबंध निदेशक, महिंद्रा म्यूचुअल फंड
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आशुतोष बिश्नोई, प्रबंध निदेशक, महिंद्रा म्यूचुअल फंड
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जैसा कि हम जानते हैं कि सुरक्षा पसंद निवेशकों के लिए म्यूचुअल फंड की डेट स्कीमें हमेशा निवेश के लिए एक चुनिंदा माध्यम रही हैं। खासकर उन निवेशकों के लिए जो परंपरागत ब्याज दरों वाले निवेश के अतिरिक्त अपने पोर्टफोलियो का विविधीकरण करने के लिए एक अवसर की तलाश में रहते हैं। ऐसे ज्यादातर निवेशकों के पोर्टफोलियो में फिक्स्ड और रिकरिंग डिपॉजिट्स, डाकघर बचत या राज्यों एवं केंद्र सरकारों की अन्य स्कीमों का समावेश रहता है। 
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ये निवेशक म्यूचुअल फंड की डेट स्कीमें केवल लेन-देन की आसानी या पारदर्शिता के लिए नहीं चुनते हैं, बल्कि डेट फंड्स द्वारा दिए गए रिटर्न का इतिहास भी निवेशकों को आकर्षित करता है। यहां तक कि आज भी म्यूचुअल फंड उद्योग के डेट फंड्स में कुल एयूएम (असेट अंडर मैनेजमेंट) इक्विटी स्कीम के कुल एयूएम की तुलना में ज्यादा है।

मिलता है क्रेडिट रेटिंग का विश्वास

डेट म्यूचुअल फंड ब्याज दर वहन करनेवाली प्रतिभूतियों- जैसे बांड्स, व्यावसायिक पेपर्स (सीपी), सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट्स एवं मनी मार्केट जैसे संसाधनों में निवेश करते हैं। ये सभी संसाधन या पेपर्स बाजार से पैसे जुटाने के लिए उपयोग किए जाते हैं और रिटर्न के रूप में ये म्यूचुअल फंड को ब्याज की अदायगी करते हैं। निवेशकों को जो इसमें मिलता है वह है स्वतंत्र और नियंत्रित क्रेडिट रेटिंग का विश्वास, रेटिंग एजेंसियां समय-समय पर इन पेपर्स की रेटिंग करती हैं और निवेश ग्रेड के अनुसार इनका वर्गीकरण किया जाता है ताकि निवेशकों को इसके बारे में जानकारी मिलती रहे और वे निवेश करने से पहले इसे पूरी तरह से समझ लें। यह सभी सूचनाएं सार्वजनिक रहती हैं और इसके लिए किसी भी तरह का कोई शुल्क नहीं लगता है। बाजार में काफी सारे निवेश के विकल्प मौजूद हैं जो निवेशकों के निवेश के आकार और इच्छा के अनुरूप प्रवेश करने के लिए काफी हैं।
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मिलती रहती है ब्याज से आय

डेट म्यूचुअल फंड का रिटर्न समय-समय पर ब्याज आय के रूप में उपरोक्त प्रतिभूतियों और पेपर्स से आ सकता है और पूंजी में वृद्धि या पूंजी में कमी पेपर के मूल्य पर निर्धारित होती है जो ब्याज दरों में बदलाव के आधार पर होता है। ब्याज और साथ ही साथ मूल्य में वृद्धि या गिरावट डेट फंड के नेट असेट वैल्यू (एनएवी) में भी दिख जाती है।

ब्याज दरों में बदलाव का रिटर्न पर असर

डेट बाजार का रिटर्न किसी भी अर्थव्यवस्था की ब्याज दरों में हुए बदलाव से प्रभावित होता है। ब्याज दर किसी भी अर्थव्यवस्था में पैसे के मूल्य से ही प्रभावित होती है। पैसे की मांग और आपूर्ति में बदलाव पैसों के मूल्य को प्रभावित करती है। जिन कारणों से मांग और आपूर्ति के मिश्रण पर प्रभाव पड़ता है, वे हैं पैसों के लिए सरकार की मांग, ग्राहक की मांग और कारपोरेट की मांग। यही सब घरेलू अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति या महंगाई को भी प्रभावित करते हैं। साथ ही कमोडिटी की कीमतें, खासतौर पर कच्चा तेल अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति को प्रभावित करता है। ब्याज दरें और बांड की कीमतों का उल्टा रिश्ता होता है और ब्याज दरें डेट योजनाओं के रिटर्न को प्रभावित करती हैं।

एचएनआई, संस्थागत और कारपोरेट हैं मुख्य निवेशक

डेट की लिक्विड और लो ड्यूरेशन जैसी योजनाएं उन निवेशकों के लिए बनाई जाती हैं जो शॉर्ट टर्म में अपने बचे हुए पैसों का कहीं निवेश करना चाहते हैं, ताकि उन्हें टाइम डिपॉजिट की तुलना में कुछ दिनों के लिए एक अच्छा रिटर्न मिल जाए। ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि निवेशकों को जब भी पैसे की जरूरत हो तुरंत वापस भी मिल जाए। इन स्कीमों के निवेशक ज्यादातर कारपोरेट, संस्थागत निवेशक और हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल (एचएनआई) यानी धनवान निवेशक होते हैं। हालांकि इस तरह की योजनाओं में निवेशकों को 2-3 साल का नजरिया रखना चाहिए और उसके अनुसार रिटर्न की अपेक्षा करनी चाहिए।
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