प्रौद्योगिकी कंपनियों में बड़े पैमाने पर छंटनी के बावजूद भारतीय गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की तरफ से बांटे गए शिक्षा ऋण के भुगतान पर कोई असर नहीं पड़ा है।
विज्ञापन
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने बृहस्पतिवार को जारी रिपोर्ट में कहा कि शिक्षा क्षेत्र को एनबीएफसी से दिए गए कर्जों के फंसने का जोखिम 0.5% से भी कम रहा है। इन कर्जों में 90 फीसदी से भी अधिक हिस्सेदारी विदेशी शिक्षा के लिए आवंटित ऋण की है।
क्रिसिल के वरिष्ठ निदेशक अजीत वलोनी ने कहा, एनबीएफसी के शिक्षा कर्जों के एनपीए बनने का प्रतिशत बहुत कम रहने की कुछ संरचनात्मक वजहें भी हैं। छात्र के साथ माता-पिता के सह-कर्जदार होने से भी इन कर्जों को एक सुरक्षा कवर मिलता है।
वलोनी ने कहा, एनबीएफसी के कुल शिक्षा ऋण में से आधा अमेरिका में उच्च शिक्षा के लिए दिया गया है।
क्रिसिल के मुताबिक विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग एवं गणित पाठ्यक्रमों पर भारतीय छात्रों का जोर रहने और कर्ज अदायगी के सुगठित प्रावधानों ने कर्जों की गुणवत्ता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई है।
पिछले वित्त वर्ष में मंदी की आहट के बीच अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट एवं गूगल जैसी दिग्गज प्रौद्योगिकी कंपनियों ने भी हजारों कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया है।