महंगाई के मोर्चे पर मामूली राहत मिली है। फरवरी में खुदरा महंगाई दर गिरकर 6.44 फीसदी रही है। फरवरी 2022 में यह 6.07 फीसदी रही थी। जनवरी में तीन महीनों के उच्च स्तर 6.52 फीसदी और दिसंबर 2022 में 5.72 फीसदी पर रही थी। हालांकि, महंगाई दर अभी भी आरबीआई के 6 फीसदी के उच्च स्तर के दायरे से ऊपर है। इस तरह लगातार दूसरे महीने खुदरा महंगाई आरबीआई के दायरे से बाहर रही है। इसे देखते हुआ आरबीआई रेपो रेट को बढ़ाकर सात वर्षों के उच्चतम स्तर तक पहुंचा सकता है। खुदरा महंगाई नवंबर 2022 में 5.88 फीसदी थी।
बढ़ सकती हैं ब्याज दरें
पिछले दो महीनों से बढ़ी हुई खुदरा महंगाई आरबीआई को ब्याज दरें बढ़ाने के लिए प्रेरित करेंगी। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक 6 अप्रैल को होनी है। इसमें लगातार सातवीं बार ब्याज दरें बढ़ सकती हैं। आरबीआई ने मई 2022 से ब्याज दरों में 2.5 फीसदी का इजाफा किया है। डीबीएस ग्रुप रिसर्च ने कहा कि रिजर्व बैंक अगले महीने अपनी द्विमासिक नीति समीक्षा में दरों में 0.25% की वृद्धि कर सकता है।
रिजर्व बैंक ने 2022-23 के लिए खुदरा मुद्रास्फीति 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है, जबकि जनवरी-दिसंबर तिमाही में यह 5.7 प्रतिशत रहेगी। सरकार ने केंद्रीय बैंक को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि खुदरा मुद्रास्फीति दोनों तरफ दो प्रतिशत के मार्जिन के साथ चार प्रतिशत पर बनी रहे। बढ़ती कीमतों को रोकने के लिए आरबीआई ने पिछले साल मई से ब्याज दरों में 250 आधार अंकों की बढ़ोतरी की है। फरवरी में नीतिगत दर में 25 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोतरी के साथ बेंचमार्क नीतिगत दर (Repo Rate) 6.50 प्रतिशत पर पहुंच गई है।