हालांकि हाल के हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतों में काफी गिरावट आई है, लेकिन मुद्रास्फीति (Inflation) पर सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ सका है क्योंकि ईंधन का सभी उपभोक्ता वस्तुओं की श्रेणी में बहुत छोटा हिस्सा है। वहीं, खाद्य पदार्थों की महंगाई का हिस्सा कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) में लगभग आधा है। इसमें बढ़ोतरी दर्ज की गई, क्योंकि इस बार रिकॉर्ड गर्मी पड़ने से गेहूं, चावल और दालों की कीमतें उछलीं हैं। इससे पहले से महंगाई की मार झेल रहे घरेलू बजट पर दबाव बढ़ा है।
आंकड़ों के अनुसार, खाद्य पदार्थों की महंगाई दर अगस्त में 7.62 प्रतिशत रही, जो जुलाई में 6.69 प्रतिशत और अगस्त 2021 में 3.11 प्रतिशत थी। बता दें कि इस बार देश में मानसून का अनियमित रहना फसलों के अधिक नुकसान का संकेत देता है। इससे आने वाले महीनों में खाद्य पदार्थों की कीमतें और बढ़ने की आशंका बढ़ गई है। मौसम के प्रतिकूल रहने के कारण सितंबर से नवंबर महीनों के बीच खाद्य पदार्थों की कीमतों पर और दबाव बढ़ सकता है।
आरबीआई के अनुमानों के मुताबिक वर्ष 2023 की शुरुआत तक मुद्रास्फीति इसके लक्ष्य सीमा (टॉललेंस बैंड) के ऊपरी छोड़ छह प्रतिशत के ऊपर बना रह सकता है। बता दें कि आरबीआई गवर्नर ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि मुद्रास्फीति चरम पर है और इसके अगले वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही तक घटकर लगभग पांच प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है। कीमतों पर दिख रहा ताजा उछाल भारत जैसे देश के लिए इसलिए अच्छी खबर नहीं है क्योंकि यह आपूर्ति-संचालित मुद्रास्फीति से पहले से जूझ रहा है।