शहरों में परिवहन की सुविधा आसान होने से नौकरियों में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ेगी। भारत के शीर्ष पांच शहरों में 2028 तक महिला कार्यबल में छह फीसदी से अधिक की वृद्धि हो सकती है। अगर महिलाओं को सवारी का सहारा मिलता रहा तो बंगलूरू, दिल्ली, चेन्नई, कोलकाता व मुंबई जैसे शहरों में ही पांच लाख से अधिक महिलाएं नौकरियों में शामिल हो सकती हैं।
उबर व ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की ओर से जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 2028 तक पांच शहरों में कार्यबल में महिलाओं की संख्या को 3.7 फीसदी से 6.5 फीसदी के बीच बढ़ सकती है। इन शहरों में आने जाने के लिए जो निजी साधन हैं, उन्होंने महिलाओं को कार्यबल में प्रवेश की बाधाओं को दूर करने, काम और परिवार के बीच संतुलन बनाने और सुरक्षा को प्राथमिकता देने में सक्षम बनाया है।
सुरक्षा के कारण महिलाएं करती है इन साधनों का उपयोग
रिपोर्ट के अनुसार, 10 में से आधी कामकाजी महिला यात्रियों का मानना है कि आने जाने में इस आसानी ने कार्यबल में उनके प्रवेश को सुविधाजनक बनाने में अहम भूमिका निभाई है। आधा का मानना है कि परिवार और ऑफिस के कार्य में संतुलन बनाने में उनको मदद मिली है। 75% महिलाओं ने कहा, सुरक्षा के कारण वे इस तरह के साधनों का उपयोग करती हैं।
दिल्ली की महिलाएं दूसरे स्थान पर
चेन्नई की 44 फीसदी महिलाओं को आसान सवारी यात्रा से पूरे समय काम करने की सुविधा मिली जबकि 52 फीसदी को नौकरी पाने में आसानी हुई। दिल्ली में 38 फीसदी महिलाओं को फुल टाइम काम करने में सुविधा हुई जबकि 46 फीसदी ने इस वजह से नौकरी करना शुरू किया। मुंबई में यह औसत 23 और 29 फीसदी जबकि, देश में यह औसत 33 फीसदी और 40 फीसदी है।