फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रिपोर्ट: अनुभवी इंजीनियरों को तरजीह दे रहीं कंपनियां, फ्रेशर्स के सामने रोजगार का संकट

Wed, 16 Sep 2026 09:23 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला नेटवर्क, मुंबई।

सार

कंपनियां रोजगार के लिए अनुभवी इंजीनियरों को तरजीह दे रहीं हैं। फ्रेशर्स के सामने रोजगार का संकट पैदा होने लगा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक कुल पेशेवरों का 45% हिस्सा होने के बावजूद नौकरियों में फ्रेशर्स की हिस्सेदारी मात्र 28%  है। 9.5 फ्रेशर्स एक नौकरी के लिए कतार में हैं।
विज्ञापन
दफ्तरों में बड़ा असंतुलन (प्रतीकात्मक) - फोटो : एएनआई
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

देश के इंजीनियरिंग बाजार में प्रतिभा और मांग के बीच बड़ा असंतुलन  देखने को मिल रहा है। फाउंडिट की एक रिपोर्ट के अनुसार, शून्य से तीन साल के अनुभव वाले इंजीनियर (फ्रेशर्स)  कुल पेशेवर उम्मीदवारों का 45 फीसदी हिस्सा हैं, लेकिन नौकरियों में उनकी हिस्सेदारी मात्र 28 फीसदी है। इस असंतुलन के चलते शून्य से 3 साल के अनुभव वाले स्तर पर प्रत्येक नौकरी के लिए 9.5 उम्मीदवार कतार में हैं। इसके विपरीत, तीन साल से अधिक अनुभव वाले सभी वर्गों में यह अनुपात घटकर प्रति पद केवल चार से पांच उम्मीदवारों का रह जाता है।

विज्ञापन


जॉब एंड टैलेंट्स प्लेटफॉर्म की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियां अनुभवी इंजीनियरों को अधिक प्राथमिकता दे रही हैं। 4 से 10 साल के अनुभव वाले इंजीनियर सक्रिय उम्मीदवारों के कुल पूल का 42 फीसदी हिस्सा हैं, लेकिन कुल इंजीनियरिंग नौकरियों में उनकी हिस्सेदारी 54 फीसदी है। वहीं, 15 साल से अधिक अनुभव वाले वर्ग में उम्मीदवार और नौकरी का अनुपात 9.5 से घटकर 4.1 रह जाता है। अगस्त 2026 के अनुमान के अनुसार, देश में इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि की आवश्यकता वाली 6,68,000 नौकरियों के मुकाबले 39.59 लाख सक्रिय उम्मीदवार हैं। प्रत्येक पद के लिए औसतन 5.9 उम्मीदवार उपलब्ध हैं। ऑटोमोबाइल में प्रति पद लगभग 1.2 उम्मीदवार हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स में यह संख्या 11.5 तक है।  

मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां दूसरे स्थान पर काबिज

  • टेक्नोलॉजी सेक्टर अभी भी इंजीनियरों के लिए सबसे बड़ा गंतव्य बना हुआ है, लेकिन अधिकांश अवसर इसके बाहर उपलब्ध हैं।
  • आईटी, सॉफ्टवेयर, सर्विसेज और जीसीसी : कुल इंजीनियरिंग नौकरियों में 33 फीसदी हिस्सेदारी रखते हैं जबकि शेष 67 फीसदी नौकरियां अन्य उद्योगों में हैं। 
  • मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्रियल सेक्टर : 15 फीसदी हिस्सेदारी के साथ दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है। 
  • कंस्ट्रक्शन, इंजीनियरिंग और रियल एस्टेट : 13 फीसदी नौकरियों के अवसर प्रदान करता है। n इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर्स, ऑटोमोटिव, ईवी, ऊर्जा और रिन्यूएबल्स: ये क्षेत्र मिलकर 26 फीसदी अवसरों का सृजन करते हैं।

कंप्यूटर साइंस/आईटी सबसे बड़ा टैलेंट पूल

विज्ञापन

इंजीनियरिंग शाखाओं में स्पेशलाइजेशन की बात करें तो कंप्यूटर साइंस/आईटी सबसे बड़ा टैलेंट पूल होने के बावजूद समग्र बाजार औसत के करीब है, जहां प्रति पद 5.8 उम्मीदवार हैं। वहीं, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन/टेलीकॉम में प्रति अवसर 10.9 और इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन में 11.5 उम्मीदवार हैं।

भर्तियों में बंगलूरू शीर्ष पर, दिल्ली-एनसीआर दूसरे नंबर पर
शहरों के हिसाब से बंगलूरू देश का सबसे बड़ा इंजीनियरिंग भर्तियों का केंद्र (हायरिंग हब) बना हुआ है। कुल अवसरों में बंगलूरू की हिस्सेदारी 19 फीसदी (लगभग 1,27,000 नौकरियां) है। इसके बाद दिल्ली-एनसीआर 13 फीसदी हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर है। वहीं, हैदराबाद में 12फीसदी, पुणे में 10 फीसदी, चेन्नई में 9 फीसदी और मुंबई में 8 फीसदी इंजीनियरिंग नौकरियां उपलब्ध हैं।

उद्योगों के साथ खुद को ढालने की जरूरत
फाउंडिट के चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर तरुण शर्मा ने कहा, अब इंजीनियरिंग कॅरिअर किसी एक सेक्टर या पारंपरिक रास्ते तक सीमित नहीं है। टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रा, ऑटो, इलेक्ट्रॉनिक्स और एनर्जी में इंजीनियरों के पास व्यापक अवसर हैं। इंजीनियरों को उद्योगों के साथ खुद को ढालने की जरूरत है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें