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Renewable Industry: नवीकरणीय उद्योग से तीन साल में 17 लाख को रोजगार, 26% की दर से बढ़ रही कुशल युवाओं की मांग

Thu, 21 Nov 2024 05:29 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

इंडियन सोलर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अश्विनी सहगल के मुताबिक, उद्योग के सभी स्तरों खासकर सेल निर्माण, बैटरी स्टोरेज और उन्नत ग्रिड एकीकरण जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों में कुशल श्रम की कमी है। उन्होंने कहा कि कुशल कामगारों की सालाना 20 प्रतिशत की कमी देखी जा रही है। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश में सौर ऊर्जा समेत नवीकरणीय उद्योग क्षेत्र को अगले तीन साल में 17 लाख युवाओं की जरूरत होगी, लेकिन कुशल कामगारों की कमी से जूझ रहे अक्षय उद्योग से जुड़े प्रबंधकों का कहना है कि इस क्षेत्र में मांग की तुलना में कुशल युवाओं की संख्या 12 लाख तक कम है। अगले तीन साल में कुशल कामगारों की मांग में 26 फीसदी बढ़ोतरी होने की संभावना है।

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इंडियन सोलर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अश्विनी सहगल के मुताबिक, उद्योग के सभी स्तरों खासकर सेल निर्माण, बैटरी स्टोरेज और उन्नत ग्रिड एकीकरण जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों में कुशल श्रम की कमी है। उन्होंने कहा कि कुशल कामगारों की सालाना 20 प्रतिशत की कमी देखी जा रही है। ऐसे में महंगी आयातित मशीनें बेकार पड़ी हैं और उत्पादन योजनाओं पर असर पड़ रहा है। कमी पूरी करने के लिए सरकार ने साल के प्रारंभ में कौशल प्रशिक्षण में मदद देने और चीन के तकनीशियनों को वीजा प्रतिबंधों में ढील देने के लिए प्रस्ताव रखा था। अल्पेक्स सोलर की निदेशक मोनिका सहगल बताती हैं कि कंपनी प्रतिभाओं को आकर्षित करने के लिए ताइवान और वियतनाम में प्रोत्साहन और विदेशी प्रशिक्षण दे रही है। देश की सबसे बड़ी अक्षय ऊर्जा कंपनियों में से एक रिन्यू की सह संस्थापक वैशाली निगम सिन्हा ने कहा, कुशल इंजीनियरों, तकनीशियनों और परियोजना प्रबंधकों की कमी परिचालन लागत बढ़ा रही है। 

टाटा पावर 3 लाख युवाओं को दे रही प्रशिक्षण :
6 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता वाली टाटा पावर ने 11 प्रशिक्षण इकाइयों में तीन लाख युवाओं को सौर प्रतिष्ठानों, बैटरी प्रबंधन और अन्य हरित प्रौद्योगिकियों में प्रशिक्षण दे रही हैं। कंपनी के मुख्य मानव संसाधन अधिकारी हिमाल तिवारी ने कहा कि प्रोजेक्ट निर्माण, संचालन और ररखरखाव में बड़ी संख्या में कुशल कार्यबल की जरूरत होगी।
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विशाल लक्ष्य...व्यापक उपाय जरूरी
नवीकरणीय उद्योग अधिकारियों के मुताबिक, दुनिया के तीसरे सबसे बड़े ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जक भारत को 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता 50 गीगावाट सालाना से 500 गीगावाट तक बढ़ाने के लिए इस क्षेत्र में व्यापक वित्तपोषण और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जरूरत होगी। बगैर बड़ी सरकार मदद के अक्षय ऊर्जा विनिर्माण अभियान खतरे में हो सकता है। गौरतलब है कि गत पांच साल में प्रोत्साहन पर करीब 24 अरब डॉलर खर्च किए गए हैं। साथ ही सालाना 20 अरब रुपये प्रशिक्षण और कौशल संवर्धन के लिए रखे गए हैं।

बजट 5-6 अरब...दस गुना बढ़े, तभी कारगर
नवीकरणीय परामर्श कंपनी जीएसईएस इंडिया के प्रबंध निदेशक द्विपेन बरुआ ने कहा, कंपनी ने नवीकरणीय प्रौद्योगिकियों में 7,000 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित किया है। उन्होंने बताया, सैकड़ों निजी संस्थान सरकार की सब्सिडी लेकर भी गुणवत्ताहीन प्रशिक्षण देते हैं। लेकिन हर छात्र पर कुछ हजार की सब्सिडी अपर्याप्त है। वैसे तो हर साल 10 लाख से ज्यादा इंजीनियरिंग स्नातक निकलते हैं लेकिन पारंपरिक कॉलेज सौर, पवन और अन्य नवीकरणीय तकनीकों को पढ़ाने के लिए सुसज्जित नहीं हैं।

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