प्रधानमंत्री मोदी ने आर्थिक सर्वे से पहले अपने संबोधन में कहा कि देश का ध्यान इस समय केंद्रीय बजट पर केंद्रित होना स्वाभाविक है, क्योंकि बजट देश की आर्थिक दिशा और विकास की प्राथमिकताओं को तय करता है। लेकिन सरकार की पहचान केवल बजट तक सीमित नहीं रही है। बीते वर्षों में सरकार ने ‘रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म’ की नीति के जरिए देश के विकास को नई गति दी है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अब भारत सुधारों की ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह सुधारों की यात्रा केवल सरकार तक सीमित नहीं है, बल्कि संसद के सभी सदस्यों के सकारात्मक सहयोग से इसे लगातार मजबूती मिल रही है। उन्होंने संसद के सभी साथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सहयोग और सकारात्मक ऊर्जा के कारण सुधारों की यह ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ निरंतर गति पकड़ रही है। देश अब लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के दायरे से निकलकर स्थायी और दूरगामी समाधान की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को प्रधानमंत्री मोदी ने आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी भारत की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है। उन्होंने कहा कि यह समझौता देश के उज्ज्वल भविष्य और भारतीय युवाओं के लिए नई संभावनाओं का संकेत है।
पीएम मोदी ने देश के विकास के दीर्घकालिक लक्ष्य पर भी बात की। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी का पहला चौथाई हिस्सा पूरा हो चुका है और अब अगले चरण की शुरुआत हो रही है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अगले 25 साल का यह दौर बेहद महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने बताया कि इस नए चरण का पहला बजट जल्द ही संसद में पेश किया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि वह देश की पहली महिला वित्त मंत्री हैं, जो लगातार नौवीं बार संसद में बजट पेश करने जा रही हैं। उन्होंने इसे संसदीय इतिहास का गौरवपूर्ण क्षण बताया।