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Rupee vs Dollar: रुपये को लगा बड़ा झटका; डॉलर के मुकाबले गिरकर 92 पर पहुंचा, जानिए क्या है कारण

Thu, 29 Jan 2026 09:53 AM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Rupee All Time Low: भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 92.00 पर पहुंच गया है। डॉलर की मजबूत मांग, एशियाई मुद्राओं की कमजोरी और वैश्विक अनिश्चितता के कारण रुपये पर दबाव बढ़ा है। इस साल अब तक रुपया करीब 2% कमजोर हुआ है।
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रुपया बनाम डॉलर - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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भारतीय रुपया गुरुवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। लगातार बढ़ती डॉलर की मांग और वैश्विक बाजारों में सतर्क माहौल के कारण रुपये पर दबाव बढ़ गया, जिससे यह 92.00 प्रति डॉलर के ऑल-टाइम लो तक फिसल गया।

गिरावट के कारण

  • रुपये में गिरावट की मुख्य वजह अमेरिकी डॉलर में व्यापक मजबूती और एशियाई मुद्राओं में कमजोरी मानी जा रही है।
  • वैश्विक बाजारों में डॉलर की तेजी के कारण उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ गया है, जिसका असर भारतीय रुपये पर भी साफ दिखाई दे रहा है।
  • फॉरेक्स बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा 2026 की पहली मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दरों को तटस्थ रखने के फैसले के बाद डॉलर इंडेक्स में मजबूती आई, जिससे रुपये में गिरावट तेज हुई।
  • इसके अलावा, भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से निवेशकों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ी है, जिससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव बना हुआ है।

इस साल कितना कमजोर हुआ रुपया?

इस साल अब तक रुपया करीब 2% कमजोर हो चुका है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत के माल निर्यात पर भारी टैरिफ लगाए जाने के बाद से रुपया लगभग 5% तक गिर चुका है।

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इंटरबैंक बाजार में रुपया 91.95 पर खुला और गिरकर 92.00 तक पहुंच गया। यह अपने पिछले बंद स्तर से 1 पैसा कमजोर रहा। बुधवार को रुपया 31 पैसे की गिरावट के साथ 91.99 पर बंद हुआ था, जो उसका अब तक का सबसे कमजोर क्लोजिंग स्तर है। इससे पहले 23 जनवरी को रुपया इंट्रा-डे कारोबार में भी 92.00 के स्तर तक पहुंच गया था।

क्या है विशेषज्ञों की राय?

  • सीआर फॉरेक्स एडवाइजर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर अमित पाबरी ने कहा कि लगातार पूंजी निकासी के कारण डॉलर की मांग बनी हुई है, जिससे रुपये पर दबाव कायम है।
  • इस सप्ताह कच्चे तेल की कीमतों में 4 प्रतिशत से अधिक की तेजी आई है और लगातार तीसरे सत्र में बढ़त दर्ज की गई है।
  • यह तेजी अमेरिका द्वारा ईरान को लेकर संभावित सैन्य कार्रवाई की चेतावनी के बाद आई है, जिससे तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई है।
  • पाबरी के अनुसार, भारत एक बड़ा तेल आयातक देश होने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक बनी रहने वाली तेजी के प्रति अधिक संवेदनशील है।

 

डॉलर इंडेक्स में आई गिरावट

इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.29 प्रतिशत गिरकर 96.16 पर कारोबार कर रहा था। वैश्विक तेल बाजार में ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 1.32 प्रतिशत की बढ़त के साथ 69.30 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

आरबीआई के हस्तेक्षप से रुपये की गिरावट हो सकती है सीमित

फॉरेक्स विशेषज्ञों का मानना है कि नॉन-डिलीवरी फॉरवर्ड (NDF) बाजार में USD/INR का 92.00 के आसपास बना रहना एक अहम तकनीकी स्तर है। अगर यह स्तर स्थायी रूप से टूटता है, तो रुपया 92.20 से 92.50 के स्तर तक कमजोर हो सकता है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के संभावित हस्तक्षेप और डॉलर में नरमी रुपये की गिरावट को सीमित कर सकती है और इसे 91.00-91.20 के स्तर की ओर वापस खींच सकती है।

घरेलू शेयर बाजार में दिखी कमजोरी

घरेलू शेयर बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 343.67 अंक गिरकर 82,001.01 पर आ गया, जबकि निफ्टी 94.2 अंक टूटकर 25,248.55 पर कारोबार कर रहा था। हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने बुधवार को 480.26 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जो बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

औद्योगिक उत्पादन में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि

आर्थिक मोर्चे पर, भारत के औद्योगिक उत्पादन में दिसंबर 2025 में 7.8 प्रतिशत की तेज वृद्धि दर्ज की गई, जो दो वर्षों से अधिक का उच्चतम स्तर है।

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यह वृद्धि विनिर्माण, खनन और बिजली क्षेत्रों में मजबूत उत्पादन के कारण हुई। एक साल पहले दिसंबर 2024 में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर 3.7 प्रतिशत थी।

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