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GST Collection Record: पांच साल में दूसरी बार बना जीएसटी संग्रह का रिकॉर्ड, उत्तराखंड में 82 फीसदी और हरियाणा में 77 फीसदी की रही वृद्धि

Sat, 02 Jul 2022 06:40 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, नई दिल्ली।

सार

चालू वित्तवर्ष की पहली तिमाही में औसत मासिक जीएसटी 1.51 लाख करोड़ रुपये रहा है। पिछले वित्तवर्ष में यह 1.10 लाख करोड़ रुपये औसतन था। मंत्रालय ने कहा कि आर्थिक सुधार और जीएसटी चोरी रोकने से यह सफलता मिली है।
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5वें जीएसटी दिवस के अवसर पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण। - फोटो : PTI
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विस्तार
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वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) संग्रह पांच साल में दूसरी बार रिकॉर्ड बनाया है। अप्रैल में 1.68 लाख करोड़ रुपये के बाद जून में 1.45 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड संग्रह रहा है। साथ ही लगातार चौथे महीने 1.40 लाख करोड़ रुपये के पार रहा। अप्रैल में  वित्त मंत्रालय ने कहा कि जून में मिला जीएसटी इसके पहले के हर जून महीने के संग्रह से ज्यादा रहा है।

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चालू वित्तवर्ष की पहली तिमाही में औसत मासिक जीएसटी 1.51 लाख करोड़ रुपये रहा है। पिछले वित्तवर्ष में यह 1.10 लाख करोड़ रुपये औसतन था। मंत्रालय ने कहा कि आर्थिक सुधार और जीएसटी चोरी रोकने से यह सफलता मिली है।

दिल्ली का संग्रह 62 फीसदी बढ़ा
दिल्ली का संग्रह 62 फीसदी बढ़कर 4,313 करोड़, राजस्थान का 56 फीसदी बढ़कर 3,386 करोड़ रुपये रहा। आंकड़ों के अनुसार, लद्दाख और केरल में जीएसटी 118 और 116 फीसदी ज्यादा मिला। कर्नाटक में 73 और महाराष्ट्र में 63 फीसदी की वृद्धि रही।
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उत्तर प्रदेश का 6835 करोड़ रुपये का संग्रह
उत्तरप्रदेश का जीएसटी संग्रह सालाना आधार पर 49 फीसदी बढ़ा है। इस साल जून में यह 6,835 करोड़ रहा जो एक साल पहले इसी महीने में 4,588 करोड़ रुपये था। जम्मू कश्मीर का हिस्सा 24 फीसदी बढ़कर 372 करोड़, हिमाचल प्रदेश का हिस्सा 34 फीसदी बढ़कर 693 करोड़, पंजाब का हिस्सा 51 फीसदी बढ़कर 1,683 करोड़ रुपये रहा। चंडीगढ़ के जीएसटी में 41 फीसदी, उत्तराख़ंड में 82 फीसदी और हरियाणा में 77 फीसदी की वृद्धि रही।

चालू वित्तवर्ष में जीडीपी वृद्धि दर अनुमान घटा
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने शुक्रवार को वित्तवर्ष 2023 के लिए भारत के जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान को घटाकर 7.3 फीसदी कर दिया है। पहले यह 7.8 फीसदी था। इसने कहा कि तेल की ऊंची कीमतें, निर्यात में धीमापन और महंगाई का असर विकास दर पर दिखेगा।

इसने कहा कि कच्चे तेल की कीमतें अगले कुछ समय तक 105 से 110 डॉलर प्रति बैरल के बीच रह सकती हैं जो पिछले साल की तुलना में 35 फीसदी अधिक होगी। यह 2013 के बाद से सबसे ज्यादा कीमत है। इससे भारत का चालू खाता घाटा लगातार ऊंचा बना रहेगा। इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर दिखेगा।

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