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Budget 2025: रियल एस्टेट क्षेत्र को बजट में आवश्यक सुधारों की उम्मीद, रेपो दर और स्टांप ड्यूटी कम करने की मांग

Thu, 23 Jan 2025 07:24 PM IST
नविता स्वरूप बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

Budget 2025: बजट आने में अब कुछ ही दिन बाकी हैं और विभिन्न उद्योग अपनी मांग को पेश कर रहे हैं। इस कड़ी में रियल एस्टेट क्षेत्र ने अपनी किफायती आवास क्षेत्र में आ रही चुनौतियां को कम करने और ऐसी नीतियों की घोषणाओं पर विचार करने की मांग है। साथ ही, बुनियादी ढांचागत विकास को आगे बढ़ाने, किफायती आवास को आसानी से ऋण उपलब्ध करवाने की भी मांग हो रही है। आइए इस बारे में जानें।
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बजट 2025 - फोटो : amarujala.com
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बजट आने में अब कुछ ही दिन बाकी हैं और विभिन्न उद्योग अपनी मांग को पेश कर रहे हैं। इस कड़ी में रियल एस्टेट क्षेत्र ने अपनी किफायती आवास क्षेत्र में आ रही चुनौतियां को कम करने और ऐसी नीतियों की घोषणाओं पर विचार करने की मांग है, साथ ही बुनियादी ढांचागत विकास को आगे बढ़ाने, किफायती आवास को आसानी से ऋण उपलब्ध करवाने की मांग की है। 2024 में रियल एस्टेट क्षेत्र में एक मजबूत सुधार देखा गया, जिसमें आवासीय मांग 11 साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई और ऑफिस पट्टा रिकॉर्ड 53.3 मिलियन वर्ग फुट तक पहुंच गया।

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शापुरजी पाल्लोनजी रियल एस्टेट के निदेशक समूह प्रमोटर वेंकटेश गोपालकृष्णन कहते हैं, बजट में मध्यम आय वर्ग के लिए टैक्स स्लैब में संशोधन करने और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों को स्थिर करने की जरूरत है। इससे निर्माण लागत में कम होगी और किफायती आवास की मांग को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा क्षेत्रीय जरुरतों को देखते हुए ग्रीन हाउस को प्रोत्साहित करना और आवास नीति को और अधिक समावेशी बनाया जाए, वहीं कारोबार को आसान करने के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस को प्रोत्साहित करने से इस ओर निवेश आकर्षित होगा। साथ ही रेपो दर और स्टांप ड्यूटी को यदि कम किया जाता है तो आवास की मांग में और वृद्धि होने की संभावना है।

पार्टनर पल्लाडियन पार्टनर्स लिमिटेड पीयूष रामभिया कहते हैं पिछले कुछ समय से किफायती आवास कैटेगरी को चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, बिक्री में इसकी हिस्सेदारी 2019 में 38 प्रतिशत से गिरकर 18 प्रतिशत पर पहुंच गई है। 2025 के लिए हमें उम्मीद है केंद्रीय बजट आवास के लिए बुनियादी ढांचे की स्थिति, किफायती और आसानी से लोन मिलने और क्रेडिंग लिंक्ड सब्सिडी योजना को फिर से शुरू किया जाना चाहिए और बाजार की वास्तविकताओं को देखते हुए सुधारों के जरिए किफायती आवास कैटेगरी को पुनर्जीवित करने जैसे उपायो पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
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एनएआर इंडिया इंडिया के अध्यक्ष अमित चोपड़ा कहते हैं, रियल एस्टेट क्षेत्र बजट में आवश्यक सुधारों की उम्मीद कर रहा है, एक बड़ी उम्मीद ब्रोकरेज सेवाओं पर जीएसटी को इनपुट क्रेडिट के साथ 18 प्रतिशत से घटाकर इनपुट क्रेडिट के बिना 5 प्रतिशत किया जाए, इससे खरीदारों और ब्रोकरर्स दोनों वित्तीय बोझ कम होगा। होमलोन पर उच्च कर छूट के साथ किफायती आवास के लिए बेहतर प्रोत्साहन देने की जरूरत बजट में है। इन उपायों से घरों को किफायती बनाने में मदद मिलेगी और अधिक नेवेश आकर्षित हो सकेगा। इसके अलावा स्टांप ड्यूटी शुल्क और पंजीकरण शुल्क को कम करने तथा ब्याज दरों को कम करने से विशेष रूप से पहली बार घर खरीदारों के लिए और इस क्षेत्र में विकास को बढ़ावा देने में एक लंबा रास्ता तय करेगा।

बेसिक होम लोन के सीईओ व सह-संस्थापक अतुल मोंगा ने उम्मीद जताई हे कि है कि सरकार आगामी बजट में अफॉर्डेबल हाउसिंग को प्राथमिकता देगी, ताकि अधिक से अधिक भारतीयों का घर खरीदने का सपना साकार हो सके। इस बजट में होम लोन की ईएमआई चुकाने वालों को कर में छूट दी जानी चाहिए। उनके लिए सेक्शन 80 सी के तहत प्रिंसिपल रीपेंमेट में रु 1.5 लाख के कैप को बढ़ाना और सेक्शन 24 बी के तहत ब्याज पर रु 2 लाख की छूट को बढ़ाना शामिल। मोंगा के अनुसार इससे घर खरीदने वालों को प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमतों और इन्फ्लेशन से कुछ राहत मिलेगी। कन्स्ट्रक्शन मटीरियल जैसे सीमेंट पर अभी 28 फीसदी टैक्स लगाया जाता है, इसमें कटौती कर लागत को काफी कम किया जा सकता है। जिससे घर खरीदने वालों का सीधा फायदा हो सकता है। मोंगा ने यह भी कहा कि इसके अलावा ग्रीन हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को भी बढ़ावा दिया जाना चाहिए, वर्तमान में ये मार्केट का 10 फीसदी से भी कम शेयर बनाते हैं। अगर इस सेक्टर के लिए सब्सिडी और कर में छूट दी जाए तो सस्टेनेबल हाउसिंग को अपनाने में मदद मिलेगी। इन सभी प्रयासों के साथ-साथ प्रधानमंत्री आवास योजना से हाउसिंग डेफिसिट को कम करने में मदद मिलेगी, जो अब शहरी क्षेत्रों में 11.2 मिलियन युनिट्स है। समय आ गया है कि हाउसिंग मार्केट में तेजी लाने के लिए बड़े कदम उठाए जाएं और जरूरी सुधार किए जाएं।

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